राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, भिलाई। छत्तीसगढ़ के भिलाई और दुर्ग औद्योगिक क्षेत्र के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए इस बार सावन का महीना गहरी चिंता लेकर आया है। कर्मचारी पेंशन योजना (इपीएस-95) के तहत सामान्यतः हर माह की 26 से 27 तारीख तक बुजुर्गों के बैंक खातों में पेंशन की राशि जमा हो जाती थी, लेकिन इस बार एक अगस्त बीत जाने के बावजूद राशि क्रेडिट नहीं हुई है। समय पर पेंशन नहीं मिलने से पेंशनभोगियों और उनके परिवारों में असमंजस और बैचेनी की स्थिति बनी हुई है। निजी क्षेत्र से सेवानिवृत्त होने वाले इन कर्मचारियों को वर्तमान में लगभग 4,000 से 4,700 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है। इनमें से अधिकांश बुजुर्गों का घर का पूरा खर्च, जरूरी दवाइयां, बिजली-पानी के बिल और अन्य दैनिक जरूरतें इसी मासिक राशि पर पूरी तरह निर्भर करती हैं। महीने की शुरुआत में ही पेंशन न मिलने के कारण इन परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। स्थानीय पेंशनभोगी टीजी नायडू, सत्यनारायण, केपी वर्मा और एमएम साहू ने चिंता जताते हुए कहा है कि इस तरह की देरी से वरिष्ठ नागरिकों को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि इसमें कोई तकनीकी या बैंकिंग समस्या हो सकती है, तो कुछ यह भी कयास लगा रहे हैं कि शायद पेंशन राशि में संशोधन या बढ़ोतरी पर विचार चल रहा है, जिसके कारण भुगतान रोका गया है। हालांकि, संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। आधिकारिक सूचना के अभाव में लगातार बढ़ रही अफवाहों से पेंशनभोगियों की चिंता बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के पेंशनभोगियों ने मांग की है कि यदि प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से भुगतान में विलंब हुआ है, तो इसकी सूचना तुरंत सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि असमंजस की स्थिति खत्म हो सके। फिलहाल हजारों बुजुर्गों की निगाहें बैंक खातों और संबंधित विभाग पर टिकी हैं। सभी को उम्मीद है कि जल्द ही उनके खाते में पेंशन की राशि पहुंचेगी और इस अवांछित देरी की वजह भी साफ हो जाएगी। इपीएस-95 (EPS-95 – Employee’s पेनसिोन Scheme, 1995) भारत सरकार की एक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा संचालित किया जाता है। यह योजना निजी और संगठित क्षेत्र (Orgzed Sector) के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सहायता (पेंशन) प्रदान करने के लिए 1 नवंबर 1995 को लागू की गई थी। पात्रता और योगदान : इस योजना का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलता है जो एपफो के सदस्य होते हैं। कर्मचारी के वेतन से कटने वाली भविष्य निधि योगदान का एक हिस्सा (कुल मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 8.33%) सीधे इस पेंशन फंड में जमा किया जाता है। सेवानिवृत्ति आयु : आमतौर पर इस योजना के तहत पेंशन प्राप्त करने की न्यूनतम आयु 58 वर्ष है। कर्मचारी 50 वर्ष की आयु के बाद भी घटी हुई दर पर पेंशन का विकल्प चुन सकता है, बशर्ते उसने कम से कम 10 साल की सेवा पूरी कर ली हो। न्यूनतम सेवा की शर्त: पेंशन का लाभ उठाने के लिए कर्मचारी की कुल सेवा कम से कम 10 वर्ष होनी अनिवार्य है।
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