राष्ट्रवाणी: अमेरिकी किसान डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के कारण बढ़ती खेती की लागत से परेशान हैं, जिसमें डीजल और खाद की …और पढ़ें अमेरिकी किसान ट्रंप सरकार की नीतियों से परेशान हैं। डीजल की कीमतों में 67% से अधिक की वृद्धि हुई। खाद की कीमतें दोगुनी होने से लागत बढ़ी।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से अब वहां के किसान भी परेशान हो गए हैं। अमेरिका में खेती की लागत तेजी से बढ़ी है जिससे किसान आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। डीजल और खाद की कीमतों में उछाल ने किसानों की कमाई पर असर डाला है।
खेती की बढ़ती लागत के बीच उनके मन में सरकार की नीतियों को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। अमेरिकी समाचार एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, ओहायो के सोयाबीन किसान डेविड शैक्ट के लिए इस साल फसल की कटाई महंगी पड़ रही है। अमेरिका में किसानों के लिए खेती की लागत बढ़ने की एक बड़ी वजह डीजल की महंगाई है।
इस महीने सोयाबीन, मक्का और दूसरी फसलों की कटाई शुरू होने के साथ कंबाइन हार्वेस्टर और दूसरे कृषि उपकरणों को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में डीजल की जरूरत पड़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के बाद से डीजल की कीमतों में 67 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, अगली फसल की बुवाई के लिए जरूरी कुछ खाद की कीमतें भी दोगुनी हो गई हैं।
इससे किसानों के सामने अगली फसल की तैयारी और मौजूदा फसल की कटाई का खर्च जुटाने की चुनौती खड़ी हो गई है। किसानों की मुश्किलें ऐसे समय बढ़ी हैं, जब ग्लोबल एनर्जी और खाद व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
इसका असर ईंधन और उर्वरकों की कीमतों पर भी पड़ रहा है। एक ओर जहां खेती की लागत बढ़ी है तो वहीं दूसरी ओर किसानों को अपनी उपज से उतनी अधिक कमाई भी नहीं हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल कृषि जिंसों की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
यह बढ़ोतरी डीजल और खाद की कीमतों में आई तेजी से काफी कम है। किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद किसान फसल को खेत में नहीं छोड़ सकते। उन्हें किसी भी तरह कटाई पूरी करनी होगी।
ऐसे में किसानों के पास बढ़े हुए खर्च को सहन करने के अलावा सीमित विकल्प हैं। ट्रंप सरकार में किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है, कई तरह की अन्य चुनौतियां भी देखने को मिली हैं। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किसानों कहना है कि वह अभी रिपब्लिकन पार्टी से अपना समर्थन वापस लेने के बारे में नहीं सोच रहे हैं।

