तेल अवीव. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इस महीने कुपोषण से 48 फलस्तीनियों की मौत हुई है. मंत्रालय ने कहा कि 2025 में अब तक 59 फलस्तीनियों की कुपोषण से मौत हो चुकी है, जबकि 2024 में यह संख्या 50 थी. साल 2023 में सात अक्टूबर को दक्षिणी इजराइल में हुए हमले के जवाब में गाजा पर इजराइली हमले के बाद कुपोषण से चार लोगों की मौत हुई थी. शिफा अस्पताल ने बताया कि बुधवार को एक पुरुष और एक महिला की कुपोषण से मौत हो गई. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 2023 तक गाजा में कुपोषण से मरने वाले 113 लोगों में से 81 बच्चे हैं.

गाजा में हमारे पत्रकारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गयी है: चार समाचार संगठन

चार प्रमुख समाचार संगठनों ने बृहस्पतिवार को कहा कि इजराइल-हमास युद्ध जारी रहने के कारण गाजा में उनके पत्रकारों के सामने भुखमरी का खतरा पैदा हो गया है. इस बीच, शीर्ष अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ नवीनतम युद्धविराम प्रस्ताव और बंधकों की रिहाई पर बातचीत के लिए पश्चिम एशिया के प्रमुख वार्ताकारों से मिलने वाले हैं.

एसोसिएटेड प्रेस (एपी), एजेंसी फ्रांस-प्रेस, रॉयटर्स और बीबीसी द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, ”हम गाजा में अपने पत्रकारों के लिए बेहद चिंतित हैं, जो लगातार अपना और अपने परिवारों का पेट भरने में असमर्थ होते जा रहे हैं.” इन चारों समाचार संगठनों ने कहा, ”कई महीनों से, ये स्वतंत्र पत्रकार गाजा में जमीनी स्तर पर दुनिया की आंखें और कान रहे हैं. अब वे भी उन्हीं विकट परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं जिनकी रिपोर्टिंग वे कर रहे हैं.” बयान में इजराइल से गाजा में पत्रकारों के आने-जाने और क्षेत्र में पर्याप्त खाद्य आपूर्ति की अनुमति प्रदान करने का आह्वान किया गया.

यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले ही 100 से अधिक परमार्थ और मानवाधिकार संगठनों ने कहा था कि इजराइल की नाकाबंदी और जारी सैन्य हमले गाजा पट्टी में फलस्तीनियों को भुखमरी की ओर धकेल रहे हैं. इजराइल ने 21 महीने से चल रहे युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय मीडिया को गाजा में स्वतंत्र रूप से प्रवेश करने से रोक रखा है. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हमास के सात अक्टूबर, 2023 के हमले के जवाब में शुरू किये गये इजराइली युद्ध में 59,000 से ज्यादा फलस्तीनी मारे गए हैं. मंत्रालय ने अपनी गणना में उग्रवादियों और नागरिकों के बीच कोई फर्क नहीं किया है, लेकिन उसका कहना है कि मृतकों में आधे से ज़्यादा महिलाएं और बच्चे हैं.

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