यरुशलम: इजराइल की सेना ने रविवार को कुछ मीडिया संस्थानों के संवाददाताओं को निशाना बनाकर हवाई हमला किया। इस हमले में ‘अल जजीरा’ के एक संवाददाता, कुछ अन्य मीडिया संस्थानों के पांच पत्रकारों और दो अन्य लोगों की मौत हो गई।

इजराइली हमले में मारे गए सभी लोग ‘गाजा सिटी हॉस्पिटल’ परिसर के बाहर शरण लिए हुए थे। ‘शिफा हॉस्पिटल’ के अधिकारियों ने बताया कि मारे गए लोगों में ‘अल जजीरा’ के संवाददाता अनस अल-शरीफ और मोहम्मद कुरैका शामिल हैं।

अस्पताल के प्रशासनिक निदेशक रामी मोहन्ना ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) को बताया कि हमले में चार अन्य पत्रकार और दो अन्य लोग भी मारे गए। हमले में अस्पताल परिसर के आपातकालीन भवन का प्रवेश द्वार भी क्षतिग्रस्त हो गया।

इजराइल और गाजा शहर के अस्पताल अधिकारियों ने पत्रकारों की मौत की पुष्टि की, जिसे प्रेस पैरोकारों ने गाजा में युद्ध का दस्तावेजीकरण करने वालों के खिलाफ प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है। इजराइल की सेना ने बाद में रविवार को अल-शरीफ को ‘हमास सेल’ का नेता बताया। इस आरोप को ‘अल जजीरा’ और अल-शरीफ ने पहले निराधार बताकर खारिज कर दिया था।

युद्ध के दौरान यह पहली बार है, जब इजराइल की सेना ने हमले में किसी पत्रकार के मारे जाने के बाद तुरंत जिम्मेदारी ली हो। इजराइली सेना के अधिकारियों ने एक साल से भी कम समय पहले अल-शरीफ और अल जजीरा के अन्य पत्रकारों पर हमास एवं अन्य जिहादी चरमपंथी समूहों का सदस्य होने का आरोप लगाया था। इजराइल की सेना के प्रवक्ता अविचे अद्राई ने 24 जुलाई के एक वीडियो में ‘अल जजीरा’ पर निशाना साधा और अल-शरीफ पर हमास की सैन्य शाखा का हिस्सा होने का आरोप लगाया।

‘अल जजीरा’ ने इस हमले को ‘‘लक्षित हत्या’’ बताया और इजराइल के अधिकारियों पर उकसावे की कार्रवाई करने का आरोप लगाया। चैनल ने अल-शरीफ की मौत को उन आरोपों से जोड़ा, जिनका संस्थान और संवाददाता दोनों ने खंडन किया था।

‘कतर नेटवर्क’ ने एक बयान में कहा, ‘‘अनस और उनके सहयोगी गाजा के भीतर उन गिनी-चुनी आखिरी आवाजों में शामिल थे, जिन्होंने दुनिया को वहां के लोगों द्वारा झेली जा रही विनाशकारी वास्तविकताओं की बिना किसी रोक-टोक के जमीनी स्तर पर कवरेज दी।’’

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