राष्ट्रवाणी: भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर से लागू होगा, जिसे न्यूजीलैंड की संसद ने मंजूरी दे दी है। भारत-न्यूजीलैंड के बीच 20 अक्टूबर से लागू होगा FTA भारत-न्यूजीलैंड FTA 20 अक्टूबर से होगा लागू। भारतीय सामानों को न्यूजीलैंड में मिलेगा शुल्क-मुक्त प्रवेश।
न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बड़ी खुशखबरी आ गई है। दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत को पिछले हफ्ते न्यूजीलैंड की संसद ने FTA कानून को मंजूरी दी।
अब इसके लागू होने की डेट भी सामने आ गई है। बता दें कि 20 अक्टूबर से भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुफ्त व्यापार समझौता लागू हो जाएगा। इसका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का मकसद दोनों देशों के बीच वस्तु और सेवाओं का व्यापार बढ़ाना और निवेश को बढ़ावा देना है।
इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले 100 फीसदी सामानों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। बता दें कि अभी तक न्यूजीलैंड सिरेमिक, कार्पेट, गाड़ियों और उनके पुर्जों जैसे कई भारतीय सामानों पर 10 फीसदी तक ड्यूटी लगाई जाती है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश करने का भी कमिटमेंट किया है।
भारत कई देशों के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते मजबूत कर रहा है। जुलाई में ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने के बाद अब 20 अक्टूबर से न्यूजीलैंड के साथ FTA लागू हो जाएगा। जून 2026 तक पिछले 12 महीनों में दोनों देशों के बीच करीब 2.3 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था, जिसे साल 2030 तक बढ़ाकर दोगुना करने की तैयारी की जा रही है।
इस समझौते के भारतीय MSMEs को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। इस ट्रेड डील का असर कई भारतीय सेक्टर्स पर देखने को मिलेगा, जिसमें इंजीनयरिंग गुड्स, ऑटोमोबाइल्स सेक्टर, ऑटो कंपोनेंट्स, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे क्षेत्रों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच का रास्ता खुलेगा।
A Vijay for both nations 🇮🇳🇳🇿India-New Zealand FTA coming into force on 20th October 2026, on the occasion of Vijay Dashami. pic.twitter.com/YNPEpbHMvE बता दें कि भारत पहले से न्यूजीलैंड को फार्मासुटिकल, टेक्सटाइल, इंजीनयरिंग गुड्स और रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट जैसे सामान निर्यात करता आया है।
वहीं न्यूजीलैंड से भारत आने वाले प्रमुख उत्पादों में वुड और फॉरेस्ट्री, वूल, मेटल्स (Metals) और एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट शामिल हैं। हालांकि भारत सरकार ने देश के किसानों के हितों को भी ध्यान में रखा है।

