बिलासपुर। हाईकोर्ट ने प्रदेश में प्रोफेसरों की सीधी भर्ती के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि ये पद प्रमोशन से ही भरे जाएंगे। हाईकोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें मेडिकल कालेजों में प्रोफेसरों के रिक्त पदों को डायरेक्ट रिक्रूटमेंट के माध्यम से भरने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने कहा है कि प्रोफेसर पद पर भर्ती केवल 100 प्रतिशत प्रमोशन के आधार पर ही होगी।

बता दें कि राज्य सरकार ने 10 दिसंबर 2021 को एक अधिसूचना जारी कर एकमुश्त (वन टाइम) छूट देते हुए प्रोफेसर के पदों पर सीधी भर्ती का रास्ता खोला था। इसका विरोध करते हुए राज्यभर के दर्जनों एसोसिएट प्रोफेसरों ने हाईकोर्ट में अलग अलग याचिकाएं दायर की। याचिकाओं में तर्क दिया गया था कि 2013 की भर्ती नियमावली में स्पष्ट प्रावधान है कि प्रोफेसर पद पर भर्ती केवल प्रमोशन से होगी।

इस पर सरकार ने कोर्ट में कहा कि प्रदेश में नए मेडिकल कालेज खुलने और सीटें बढ़ने से बड़ी संख्या में प्रोफेसरों की जरूरत है। अभी 242 प्रोफेसरों और 396 एसोसिएट प्रोफेसरों के पद स्वीकृत हैं, जबकि योग्य प्रोफेसरों की संख्या बहुत कम है। अगर तुरंत भर्ती नहीं की गई तो मेडिकल शिक्षा पर संकट में सकता है और नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की मान्यता भी खतरे में पड़ सकती है। इसी कारण विशेष परिस्थिति में डायरेक्ट भर्ती की छूट दी गई थी।

कोर्ट ने राज्य सरकार की दलील खारिज करते हुए कहा कि भर्ती नियमावली 2013 के नियम 6 और शेड्यूल-2 में स्पष्ट लिखा है कि प्रोफेसर के पद पर 100 प्रतिशत प्रमोशन से ही भर्ती होगी। सरकार का छूट देने वाला नोटिफिकेशन असंवैधानिक है। किसी भी अधिसूचना से मूलभूत भर्ती नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। कर्मचारियों को प्रमोशन का अवसर मिलना संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 16) है, जिसे प्रत्यक्ष भर्ती से प्रभावित नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने सरकार की अधिसूचना 10 दिसंबर 2021 को असंवैधानिक और अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया। साथ ही निर्देश दिया कि प्रोफेसर पदों को भरते समय केवल नियम 2013 के अनुसार ही योग्य एसोसिएट प्रोफेसरों को प्रमोशन दिया जाए।

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