हैदराबाद. हैदराबाद पुलिस ने सोमवार को तेलुगु सिनेमा की ह्लकॉपीराइट फिल्मों के अवैध वितरणह्व में शामिल एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस ने बताया कि पटना के निवासी मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार (21) फिल्मों के सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले ही उनकी ‘एचडी प्रति’ लीक कर देता था. पुलिस के अनुसार कुमार ने बिहार और झारखंड सरकार की वेबसाइट समेत कई सरकारी वेबसाइट हैक कीं.

हैदराबाद पुलिस उपायुक्त सी.वी. आनंद ने संवाददाताओं से कहा, “कुमार ने डिजिटल मीडिया कंपनियों के मुख्य सर्वर हैक किए, एचडी फिल्में कॉपी कीं और उन्हें टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से वितरित किया. उसने इन्हें गेमिंग और सट्टेबाजी में शामिल व्यक्तियों के साथ भी साझा किया.” पुलिस ने कहा कि यह गिरफ्तारी हाल की तेलुगु फिल्मों जैसे ‘हिट: द थर्ड केस, सिंगल’, ‘कुबेरा’ और ‘हरि हरा वीरा मल्लू’ की ‘पायरेसी’ की व्यापक जांच के बाद हुई है.

तेलुगु फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स (टीएफसीसी) के वीडियो-पायरेसी रोधी प्रकोष्ठ की ओर से पांच जून को मिली शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने प्रमुख पायरेसी वेबसाइटों पर पायरेटेड एचडी प्रतियों का पता लगाया. आरोपियों में बिहार, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के लोग शामिल हैं, जिन्हें जून से अगस्त के बीच गिरफ्तार किया गया. तमिलनाडु के करूर के सायरिल इन्फैंट राज अमालाडोस (32) को रैकेट का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया.

अमालाडोस ने विदेश में कथित तौर पर वर्चुअल मशीन सर्वर खरीदे, पायरेटेड फिल्में स्टोर कीं, वेबसाइट और टेलीग्राम चैनल बनाया और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भुगतान हासिल किया. पुलिस ने बताया कि कुमार ने क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भुगतान लिया और टेलीग्राम पर पायरेटेड एचडी फिल्में प्रति कॉपी 800 अमेरिकी डॉलर में बेचीं.

पुलिस ने बताया कि वह 2020 से लगभग 500 पायरेटेड फिल्मों को अपलोड करके करीब दो करोड़ रुपये की कमाई कर चुका है.
पुलिस के अनुसार, 2023 में भारतीय मनोरंजन उद्योग को पायरेसी के कारण अनुमानित 22,400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसमें केवल तेलुगु फिल्म उद्योग को 3,700 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है.

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