रायपुर. हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को शुक्रवार को साहित्य का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया. भारतीय ज्ञानपीठ ने एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी. विज्ञप्ति में बताया गया है कि भारतीय ज्ञानपीठ के महानिदेशक आर एन तिवारी ने रायपुर में स्थित शुक्ल के निवास पर आयोजित समारोह में उन्हें 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया. समारोह में साहित्य, कला और संस्कृति जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं. विनोद कुमार शुक्ल के पुत्र शाश्वत गोपाल शुक्ल ने बताया कि तिवारी ने शुक्ल को पुरस्कार के साथ वाग्देवी की प्रतिमा और चेक प्रदान किया.

इस दौरान शुक्ल ने अपने पाठकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, ”ज्ञानपीठ सम्मान के लिए सबको धन्यवाद देता हूं. आप सब पाठकों की वजह से मुझे यह सम्मान मिला है. पाठक जनता का हिस्सा हैं.” शुक्ल ने कहा, ”जब हिंदी भाषा समेत तमाम भाषाओं पर संकट की बात कही जा रही है, मुझे पूरी उम्मीद है नयी पी­ढ़ी हर भाषा का सम्मान करेगी. हर विचारधारा का सम्मान करेगी. किसी भाषा या अच्छे विचार का नष्ट होना, मनुष्यता का नष्ट होना है.” छत्तीसग­ढ़ के राजनांदगांव में एक जनवरी 1937 को जन्मे शुक्ल का पहला कविता संग्रह ‘लगभग जय हिन्द’ 1971 में आया था. उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ (1979) ने हिंदी कथा-साहित्य को एक नया मोड़ दिया, जिस पर मणि कौल ने फिल्म भी बनाई है.

शुक्ल इससे पहले साहित्य अकादमी पुरस्कार, गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप, रजा पुरस्कार, शिखर सम्मान, राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, हिंदी गौरव सम्मान और 2023 का पैन-नाबोकोव जैसे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है.

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