राष्ट्रवाणी: UPI MDR New Date: 1 जनवरी 2027 से ₹2000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4% एमडीआर लगेगा, जिसका बोझ …और पढ़ें UPI से चुकाए ₹10000, तो उन ₹40 का असली हकदार कौन? बैंक, एप या NPCI? MDR चार्जेस का पूरा गणित 1 जनवरी 2027 से ₹2000+ यूपीआई पर एमडीआर।

0.4% एमडीआर का बोझ व्यापारियों पर, ग्राहकों पर नहीं। एमडीआर शुल्क बैंकों, ऐप, पीएसपी में बंटेगा। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।

चाय की टपरी से लेकर बड़े-बड़े शोरूम तक, हर जगह आपको पेमेंट के लिए यूपीआई का ऑप्शन जरूर दिखेगा (UPI Payments)। लेकिन अब 1 जनवरी 2027 से यूपीआई के नियम बदलने वाले है। ₹2000 से ऊपर के हर पेमेंट पर अब MDR (Merchant डिस्काउंट Rate) कटेगा, जिसने व्यापारियों को टेंशन में डाल दिया है।

लेकिन क्या आपने सोचा है कि यूपीआई पेमेंट पर जो चार्ज कटेगा वो आखिर जाएगा कहां? अगर नहीं, तो चलिए समझते हैं कि ₹2000 से ऊपर के यूपीआई पेमेंट पर कटने वाले चार्ज में से किस के पास क्या जाएगा। 1 जनवरी से ₹2000 से ज्यादा के पेमेंट पर अब 0.4% का एमडीआर चार्ज (MDR Charge) देना पड़ सकता है।

हालांकि छोटे मर्चेंट जिनका महीनेभर में ₹1 लाख से कम का कारोबार होता है, उन्हें इस नियम से बाहर रखा गया है। साथ ही ये चार्ज ग्राहक की जेब से नहीं, बल्कि मर्चेंट की जेब से लिया जाएगा। मान लीजिए आपके किसी दुकानदार या शोरूम वाले को यूपीआई के जरिए ₹10000 का पेमेंट किया।

नए रूल के हिसाब से, इस ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट को ₹40 (0.4% MDR) की लागत चुकानी पड़ेगी। अब बड़े सवाल ये है कि मर्चेंट की जेब से कटे इन ₹40 का बंटवारा कैसे होगा। ₹40 का हिसाब: ₹40= ₹16 + ₹12 + ₹8 + ₹4 ₹16 (40%) – आपका बैंक (जिसका आप इस्तेमाल करते हैं):इन ₹40 में से सबसे बड़ा हिस्सा यानी ₹16 सीधे उस बैंक को जाता है, जिसमें आपका खाता है और जहां से पैसे कटे हैं।

₹12 (30%) – दुकानदार का बैंक (जहां पैसा पहुंचा):दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा यानी ₹12 उस बैंक की झोली में जाता है, जिसमें दुकानदार का खाता है और जहां पैसे रिसीव हुए हैं। ₹8 (20%) – UPI ऐप (PhonePe, GPay, Paytm आदि):जिस एप का इस्तेमाल करके आपने पेमेंट किया है, उस एप कंपनी को इस ₹10,000 के ट्रांजैक्शन पर ₹8 की कमाई होती है।

₹4 (10%) – Payer PSP (नेटवर्क जोड़ने वाला बैंक):जो बैंक आपके UPI एप को मुख्य UPI नेटवर्क से जोड़ने का काम करता है, उसे इस पूरे प्रोसेस में ₹4 का हिस्सा मिलता है। ये नया नियम ऐसे समय में लागू होना है, जब इसे लेकर कानूनी लड़ाई भी चल रही है। 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया था।

हालांकि, कोर्ट ने इस मामले की एक याचिका पर केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक (आरबीआई) और NPCI को नोटिस जरूर जारी किया है।

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संपादक : नीरज दीवान

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