काठमांडू. नेपाल के पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक ने सोमवार को दावा किया कि ‘जेन जेड’ विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन हुई तोड़फोड़ और आगजनी “लोकतंत्र और राष्ट्र के खिलाफ एक योजनाबद्ध साजिश” का परिणाम थी. आठ और नौ सितंबर को भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ युवाओं के नेतृत्व वाले ‘जेन जेड’ विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया, जिससे प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की गठबंधन सरकार को सत्ता से हटना पड़ा था. ‘जेन जेड’ आंदोलन के दौरान कुल 77 लोग मारे गए थे, जिनमें 22 युवा शामिल थे.

लेखक सोमवार को ‘जेन जेड’ विरोध प्रदर्शन की जांच कर रहे उच्च स्तरीय आयोग के सामने पेश हुए. उन्होंने कहा कि वह 8 सितंबर की मौतों और अन्य क्षति के लिए पूर्ण नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं. उन्होंने हालांकि, दावा किया कि 9 सितंबर को देशभर में हुई तोड़फोड़ और आगजनी स्वत? उत्पन्न हिंसा नहीं थी, बल्कि यह लोकतंत्र और राष्ट्र के खिलाफ एक योजनाबद्ध साजिश का परिणाम थी.

नेपाली कांग्रेस के नेता ने कहा कि आठ सितंबर की घटना के तुरंत बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि गृह मंत्रालय के राजनीतिक प्रमुख के रूप में उन्हें व्यक्तिगत और संस्थागत रूप से जिम्मेदारी महसूस हुई. हालांकि, लेखक ने 8 सितंबर के शांतिपूर्ण ‘जेन जेड’ विरोध प्रदर्शन और 9 सितंबर की हिंसक घटनाओं के बीच स्पष्ट अंतर किया. उनके अनुसार, 8 सितंबर का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, जिसे बाद में भड़काया और हथिया लिया गया, जिससे अगले दिन व्यापक आगजनी और हमले हुए.

उन्होंने कहा, “9 सितंबर की हिंसक घटनाएं राष्ट्रीय अखंडता, गरिमा और लोकतंत्र के खिलाफ थीं. कोई भी देशभक्त नेपाली सिंह दरबार सचिवालय, उच्चतम न्यायालय, संसद और राष्ट्रपति कार्यालय को आग लगाने की कल्पना भी नहीं कर सकता.” उन्होंने कहा कि यह “एक योजनाबद्ध साजिश” और “राष्ट्र और लोकतंत्र पर जानबूझकर हमला” था. जांच आयोग का नेतृत्व पूर्व न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की कर रहे हैं. उसने लेखक को तलब किया था, जो ‘जेन जेड’ विरोध प्रदर्शन के दौरान गृह मंत्री थे.

लेखक ने अपने स्पष्टीकरण में दावा किया कि तब के गृह मंत्री के रूप में उन्होंने 7 सितंबर को केंद्रीय सुरक्षा समिति की बैठक बुलाई थी, जिसमें सभी सुरक्षा एजेंसियों ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने और अत्यधिक बल या हताहत से बचने पर सहमति जताई थी.
लेखक ने कहा, “जेन जेड प्रदर्शनकारियों की मांगें-भ्रष्टाचार विरोध, सुशासन और सोशल मीडिया साइट पर प्रतिबंध हटाना-वैध और व्यापक रूप से स्वीकार्य थीं.” लेखक ने कहा कि नौ सितंबर की घटना “क्षणिक क्रोध” का परिणाम नहीं हो सकती, जिसमें प्रमुख सरकारी कार्यालयों, निजी संपत्तियों, राजनीतिक पार्टी के भवनों, पुलिस इकाइयों और देशभर के व्यापारिक प्रतिष्ठानों को आग लगाई गई.
उन्होंने बताया कि इस तरह के समन्वित हमले तैयारी, योजना और इरादे को दर्शाते हैं. उन्होंने कहा, “ये स्वाभाविक घटनाएं नहीं थीं. ये राष्ट्र के संस्थानों पर संगठित हमले थे.” लेखक ने आयोग को यह सुझाव भी दिया कि यह जांच की जाए कि विरोध प्रदर्शन में कौन घुसपैठ कर गया, 9 सितंबर के हमलों की योजना किसने बनाई और उन्हें किसने अंजाम दिया. उन्होंने कहा कि युवाओं की मांगों को स्वीकार किया जाना चाहिए, लेकिन अपराधिक कृत्यों को अलग से देखना और दंडित करना जरूरी है.

ओली और लेखक के काठमांडू घाटी छोड़ने पर रोक लगा दी गई है, क्योंकि उन्हें आयोग के सामने पेश होने की आवश्यकता हो सकती है. जांच आयोग के प्रवक्ता विज्ञान राज शर्मा के अनुसार, लेखक को बुधवार को फिर से पेश होने के लिए कहा गया है, ताकि वह घटना के बारे में स्पष्टीकरण देना जारी रख सकें. शर्मा के अनुसार, आयोग ओली को तलब करने और घटना के संबंध में उनका स्पष्टीकरण दर्ज करने के लिए पत्र भेजने की तैयारी कर रहा है.

राष्ट्रवाणी एक डिजिटल समाचार एवं जनचर्चा मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक राष्ट्रीय विमर्श और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करने का दायित्व भी है। “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ राष्ट्रवाणी देश, समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, संस्कृति और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को गहराई और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
Exit mobile version