राष्ट्रवाणी: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य-रसायन योजना) को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित इस योजना के तहत रासायनिक और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को आधुनिक बुनियादी ढांचे, निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिहाज से नई मजबूती देने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भव्य-रसायन योजना को मिली मंजूरी भारत के रासायनिक और पेट्रोकेमिकल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचे, साझा सुविधाओं और मजबूत पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ रासायनिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इससे लॉजिस्टिक और उत्पादन लागत घटेगी, निवेश आकर्षित होगा, निर्यात बढ़ेगा, आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
सरकार ने योजना के लिए कुल 3,030 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसमें 3,000 करोड़ रुपए पार्कों की आंतरिक अवसंरचना और मूलभूत उपयोगिताओं के विकास पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 30 करोड़ रुपए प्रशासनिक व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू रहेगी।
योजना के तहत संबंधित राज्य सरकार को प्रत्येक पार्क के लिए न्यूनतम 500 करोड़ रुपए का योगदान करना होगा। इसके बाद केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के विकास के लिए अधिकतम 1,000 करोड़ रुपए तक का अनुदान देगी। पार्कों का चयन प्रतिस्पर्धी और प्रदर्शन आधारित वित्त पोषण तंत्र (चैलेंज रूट) के माध्यम से किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, इस योजना से कच्चे माल की उपलब्धता, विनिर्माण, आपूर्ति शृंखला और सहायक उद्योगों सहित रसायन क्षेत्र की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूती मिलेगी। साझा बुनियादी ढांचे और आधुनिक सुविधाओं से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा तथा परिवहन और प्रबंधन लागत में कमी आएगी, जिससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
योजना के माध्यम से भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से बेहतर तरीके से जोड़ने का लक्ष्य है। इससे घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। सरकार का मानना है कि इससे देश में घरेलू और विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा।
भव्य-रसायन योजना के तहत विकसित होने वाले पार्कों में साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र, उपचार, भंडारण एवं निपटान सुविधाएं तथा खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना जैसी केंद्रीकृत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे पर्यावरणीय मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा और रसायन उद्योग का सतत विकास संभव हो सकेगा।
सरकार का कहना है कि रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र का विस्तार कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अनेक क्षेत्रों को भी गति देगा। इससे रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल मिलेगा। यह पहल वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
योजना के तहत विकसित किए जाने वाले प्रत्येक रासायनिक पार्क में कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर (करीब 2,000 एकड़) का निर्बाध भूमि क्षेत्र होगा। इन पार्कों में रसायन उद्योग की जरूरतों के अनुरूप साझा अवसंरचना और मूलभूत उपयोगिताएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उद्योगों को एकीकृत और आधुनिक औद्योगिक वातावरण मिल सके।
