नयी दिल्ली: नेशनल हेराल्ड धनशोधन मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आर एस चीमा ने शनिवार को दलील दी कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की संपत्ति बेचने की कोशिश नहीं कर रही है, बल्कि उस संस्था को बचाने का प्रयास कर रही है, जो स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा थी।

चीमा ने विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने के समक्ष अपनी दलील पेश की। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी, दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और आॅस्कर फर्नांडीस, साथ ही सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और एक निजी कंपनी यंग इंडियन पर, नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करने वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों के धोखाधड़ी से अधिग्रहण करने की साजिश और धन शोधन करने का आरोप लगाया है।

चीमा ने सवाल किया, ‘‘क्या मेरे मित्र (ईडी के वकील) मुझे बता सकते हैं कि वे एजेएल के मेमोरेंडम आॅफ एसोसिएशन (एमओए) को रखने में क्यों झिझक रहे थे? एजेएल की स्थापना 1937 में जवाहरलाल नेहरू, जे. बी. कृपलानी, रफी अहमद किदवई और अन्य लोगों द्वारा की गई थी।

मेमोरेंडम आॅफ एसोसिएशन, कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत किसी कंपनी के गठन के लिए आवश्यक है।
चीमा ने कहा, ‘‘एजेएल के सहमति पत्र में कहा गया था कि एजेएल की नीति कांग्रेस की नीति होगी। एजेएल को कभी मुनाफा नहीं हुआ। आजादी के बाद की अवधि में यह कभी भी व्यावसायिक संस्था नहीं रही।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) एक ऐसी संस्था को पुन? सक्रिय करने का प्रयास कर रहे थे जो स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत का हिस्सा है। समस्या एजेएल को दिए गए ऋण की वसूली नहीं थी; समस्या इसे पुन: सक्रिय करने की थी, यह सुनिश्चित करने की थी कि यह फिर से पटरी पर आ जाए। एआईसीसी बिक्री में लाभ नहीं देख रही थी। यह एक संक्षिप्त संस्करण है।’’

ईडी का आरोप है कि गांधी परिवार के पास यंग इंडियन में 76 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी, जिसने 90 करोड़ रुपये के ऋण के बदले में धोखाधड़ी से एजेएल की संपत्ति ‘हड़प’ ली। इससे पहले शुक्रवार को सोनिया गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु ंिसघवी ने अपनी दलीलें पूरी कीं थी।

ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू द्वारा तीन जुलाई को मामले में दायर आरोपपत्र के संज्ञान के ंिबदु पर अपनी दलीलें देते हुए कहा कि गांधी परिवार यंग इंडियन के ‘लाभ प्राप्त करने वाले मालिक’ हैं और अन्य शेयरधारकों की मृत्यु के बाद उन्होंने पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है।

ईडी ने गांधी परिवार और अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 3 (धन शोधन) और 4 (धन शोधन के लिए सजा) के तहत आरोप पत्र दायर किया। ईडी के आरोपपत्र में दुबे, पित्रोदा, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को भी नामजद किया गया है।

राष्ट्रवाणी एक डिजिटल समाचार एवं जनचर्चा मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक राष्ट्रीय विमर्श और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करने का दायित्व भी है। “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ राष्ट्रवाणी देश, समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, संस्कृति और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को गहराई और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
Exit mobile version