हुबली. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को आशंका जताई कि कर्नाटक में जाति आधारित सर्वेक्षण के आंकड़े बेचे जा सकते हैं, जिससे इस कवायद के पीछे की मंशा पर संदेह पैदा हो गया है. पत्रकारों से यहां बातचीत में जोशी ने सर्वेक्षण के दायरे पर सवाल उठाते हुए कहा, ”कई अवांछित विवरण एकत्र किए जा रहे हैं. कुल 60 प्रश्न हैं, जिनमें आपकी आय क्या है, आपने कितना आयकर चुकाया है, आपकी मासिक आय क्या है, क्या आपके घर में विधवाएं हैं, क्या आपको कभी जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा है और क्या आप किसी सामाजिक संगठन के सदस्य हैं, जैसे सवाल शामिल हैं. लेकिन आप इन विवरणों का क्या करेंगे? आपने कहा था कि आप केवल एक जाति आधारित सर्वेक्षण कर रहे हैं.” उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ. कांग्रेस लगभग दो दशकों से जाति आधारित गणना की बात कर रही है, जिसकी शुरुआत 28 मई, 2004 से 28 जनवरी, 2006 के बीच कर्नाटक में दिवंगत एन धरम सिंह के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के कार्यकाल से हुई थी.

जोशी ने आरोप लगाया, ”कांग्रेस सरकार ने 2013 में पैसा खर्च किया, लेकिन 2018 तक कुछ नहीं किया.” जोशी ने दावा किया, ”2023 में सत्ता में आने के बाद कांग्रेस ने फिर से जाति अधारित गणना की बात की और कहा कि उसके पास सारे आंकड़े हैं, लेकिन बाद में 174 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद उसे छोड़ दिया. अब वे फिर कह रहे हैं कि उन्होंने कुछ जातियों को हटा दिया है.” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार गणकों को सभी विवरण एकत्र करने के लिए धमका रही है. उन्होंने आंकड़ों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा, ”आंकड़ों को सुरक्षित किया जाना चाहिए, लेकिन क्या यह सुरक्षित है?” कर्नाटक की कांग्रेस सरकार एक सामाजिक एवं शैक्षिक सर्वेक्षण (जिसे आम तौर पर जाति आधारित गणना कहा जा रहा है) करा रही है, जिसकी अनुमानित लागत 420 करोड़ रुपये है.
यह सर्वेक्षण 22 सितंबर को शुरू हुआ और सात अक्टूबर को समाप्त होगा.

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