नयी दिल्ली: खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल में एशियाई प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष और महिला लैक्रोस टीमों को बुधवार को यहां सम्मानित किया और वह चाहते हैं कि ये टीमें 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई करे।

लैक्रोस कम प्रचलित खेल है और यह खेल 100 वर्ष से भी अधिक समय के बाद ओलंपिक में वापसी करेगा। यह मूल रूप से अमेरिकी खेल है जिसमें जालीदार सिरे वाली लंबी छड़ी का उपयोग करके रबर की गेंद को पकड़ा जाता है, पास दिया जाता है और प्रतिद्वंद्वी के गोल में फेंका जाता है।
इस खेल ने 1904 में एक पदक स्पर्धा के रूप में ओलंपिक में पदार्पण किया था। इसके चार साल बाद फिर से यह ओलंपिक का हिस्सा बना। इसके बाद 1928, 1932 और 1948 में प्रदर्शनी खेल बना रहा।

मांडविया ने दोनों टीमों से कहा, ”लैक्रोस भारत में अपनी जड़ें जमा रहा है। यह आपका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय अनुभव था और आप पहले ही पदक जीत चुके हैं। अब आपका ध्यान और अधिक मेहनत करने, अधिक अनुभव प्राप्त करने और ओलंपिक 2028 के लिए क्वालीफाई करके देश को गौरवान्वित करने पर होना चाहिए।” भारत ने फरवरी में सऊदी अरब के रियाद में आयोजित एशियाई लैक्रोस खेलों में शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने छह खिलाड़ियों वाले प्रारूप में पुरुष और महिला दोनों वर्ग में स्वर्ण पदक जीते। ओलंपिक 2028 में इसी प्रारूप में स्पर्धाएं होगी।

भारत की पुरुष टीम ने फाइनल में इराक जबकि महिला टीम ने पाकिस्तान को हराया। इन दोनों टीमों में राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, जम्मू और कश्मीर, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश सहित देश के सभी हिस्सों के खिलाड़ी शामिल हैं।
भारतीय टीम अब चीन के चेंगडू में अप्रैल में तीसरे एशियाई लैक्रोस खेलों में भाग लेंगी जिसके बाद अक्टूबर में आस्ट्रेलिया में एशिया पेसीफिक सिक्सेस लैक्रोस चैम्पियनशिप खेली जानी है जो लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 का क्वालीफायर भी होगी ।






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