राष्ट्रवाणी (दंतेवाड़ा ब्यूरो): इस सवाल का जवाब समझने के लिए चक्रवात की ऐक्टिविटी को देखना होगा. भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान अर्नब 28 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश और यानम के तट से टकराया था. तट से टकराते समय यह बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान की कैटिगरी में था. इस दौरान इसकी अधिकतम हवा की गति 125-135 किलोमीटर प्रति घंटे की थी, जबकि झोंकों की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही थी. तट से टकराने के बाद यह धीरे-धीरे कमजोर हुआ और 29 अक्टूबर को इसका अवशेष दक्षिण छत्तीसगढ़ और आसपास के इलाकों में लो प्रेशर वाली मौसमी गतिविधियों के रूप में ऐक्टिव था. इसका असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर भी पड़ा. राज्य में बारिश, तेज हवाएं और बादलों की आवाजाही देखने को मिली. चक्रवात के दौरान तेज हवाएं जमीन की ऊपरी परत से धूल, मिट्टी, रेत और दूसरे सूक्ष्म कणों को उठाकर वायुमंडल में पहुंचा सकती हैं. अगर उस इलाके की मिट्टी में आयरन ऑक्साइड यानी लौह ऑक्साइड की मात्रा अधिक है, तो उसके बारीक कण लाल या जंग के जैसे रंग के हो सकते हैं. तेज हवाएं इन कणों को वातावरण में फैलाती हैं. जब सूर्य की रोशनी इन कणों से होकर गुजरती है, तो आसमान लाल रंग में दिखाई दे सकता है. यही एक वैज्ञानिक वजह है, जिसकी चर्चा छत्तीसगढ़ के वायरल वीडियो के बारे में हो रही है. लेकिन अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक टेस्ट या फिर मौसम से जुड़ा हुआ नतीजा सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि किरंदुल के आसमान में मौजूद कण वास्तव में आयरन ऑक्साइड वाली लाल मिट्टी के थे. आसमान का रंग बदलने के पीछे प्रकाश का विज्ञान काम करता है. इसे समझने के लिए सूर्य की रोशनी और उसके अलग-अलग रंगों को जानना जरूरी है. हमारी आंखों को सूर्य की रोशनी सफेद दिखाई देती है, लेकिन वास्तव में इसमें कई रंग शामिल होते हैं. लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला और बैंगनी रंग मिलकर सफेद रोशनी बनाते हैं. हर रंग की वेवलेंथ अलग होती है. नीले और बैंगनी रंग की वेवलेंथ छोटी होती है. लाल रंग की वेवलेंथ सबसे लंबी होती है. नारंगी और पीले रंग की वेवलेंथ इनके बीच होती है. जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है, तो हवा में मौजूद गैसों के अणु प्रकाश को अलग-अलग दिशाओं में बिखेरते हैं. नीली रोशनी छोटी वेवलेंथ होने के कारण ज्यादा बिखरती है. इसी वजह से दिन के समय हमें आसमान नीला दिखाई देता है. लेकिन जब वातावरण में धूल, धुआं, प्रदूषण या दूसरे सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़ जाती है, तो प्रकाश के बिखरने और एब्जॉर्ब होने का तरीका बदल सकता है. ऐसे में लाल, नारंगी और पीले रंग की रोशनी दिखाई दे सकती है. प्रकाश के इस बिखरने की प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में Scattering of Light यानी प्रकाश का बिखरना कहते हैं. इसमें दो प्रक्रियाएं खासतौर पर अहम हैं. पहली रेले स्कैटरिंग (Rayleigh Scattering) है. हवा के बहुत छोटे अणुओं की तरफ से प्रकाश का बिखरना. इसी प्रक्रिया के कारण सामान्य दिनों में आसमान नीले रंग का दिखाई देता है. मी स्कैटरिंग (Mie Scattering). जब प्रकाश हवा में मौजूद अपेक्षाकृत बड़े कणों, जैसे धूल, धुएं और पानी की बूंदों से टकराता है, तो उसका बिखराव होता है. इससे आसमान और बादलों के रंग और चमक प्रभावित हो सकते हैं. यही वजह है कि वातावरण में मौजूद कणों के आकार, उनकी मात्रा और सूर्य की स्थिति के आधार पर आसमान का रंग बदल सकता है. आसमान लाल होने का सबसे सामान्य उदाहरण सूर्यास्त और सूर्योदय के समय देखने को मिलता है. दोपहर में सूर्य लगभग सिर के ऊपर होता है. ऐसे में उसकी रोशनी को वायुमंडल की अपेक्षाकृत कम दूरी तय करनी पड़ती है. इस दौरान नीली रोशनी अधिक बिखरती है और आसमान नीला दिखाई देता है. लेकिन शाम को सूर्य जब क्षितिज के करीब पहुंचता है, तो उसकी रोशनी को हमारी आंखों तक पहुंचने के लिए वायुमंडल में लंबा रास्ता तय करना पड़ता है. इस लंबी दूरी में नीली और बैंगनी रोशनी अधिक बिखर जाती है. इसके मुकाबले लाल, नारंगी और पीली रोशनी का बड़ा हिस्सा हमारी आंखों तक पहुंचता है. इसलिए सूर्यास्त के समय आसमान नारंगी, लाल और कभी-कभी गहरे लाल रंग का दिखाई देता है. अगर वातावरण में धूल और दूसरे एरोसोल भी मौजूद हों, तो ये रंग और गहरे हो सकते हैं. यही कारण है कि किसी दिन सूर्यास्त बेहद सामान्य दिखाई देता है, जबकि किसी दूसरे दिन आसमान आग की तरह लाल या नारंगी नजर आता है. हां, धूल भरी आंधी आसमान का रंग बदलने का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है. धरती की सतह पर मौजूद मिट्टी में कई तरह के खनिज पाए जाते हैं. इनमें आयरन ऑक्साइड यानी लौह ऑक्साइड भी शामिल है. इसी खनिज की वजह से कई इलाकों की मिट्टी लाल, भूरी या जंग जैसे रंग की दिखाई देती है. जब तेज हवाएं चलती हैं, तो मिट्टी के बारीक कण हवा में उठकर काफी दूर तक फैल सकते हैं. ऐसी स्थिति में कुछ चीजें महत्वपूर्ण होती हैं. अगर मिट्टी में आयरन ऑक्साइड की मात्रा अधिक है, तो उसके पार्टिकल्स लाल रंग के हो सकते हैं. इसके साथ ही दूसरा फैक्टर हवा की गति का है. तेज हवाएं इन पार्टिकल्स को वायुमंडल में ऊपर और दूर तक पहुंचा सकती हैं. सूर्य की रोशनी का रोल भी अहम होता है. धूल के कणों से गुजरने वाली सूर्य की रोशनी का बिखराव और अवशोषण बदल जाता है, जिससे वातावरण लाल या नारंगी दिखाई दे सकता है. क्या जंगलों की आग- धुआं भी आसमान को लाल कर सकते हैं?
हां, जंगलों में आग लगने से निकलने वाला धुआं भी आसमान के रंग को प्रभावित कर सकता है. जंगलों में आग लगने पर बड़ी मात्रा में धुआं, राख और सूक्ष्म कण वातावरण में पहुंचते हैं. इनमें कार्बन के कण और कई तरह के एरोसोल शामिल होते हैं. ये कण सूर्य की रोशनी को बिखेरने और अब्जॉर्ब करने का काम करते हैं. अगर धुएं की परत काफी घनी हो तो सूर्य की रोशनी कमजोर पड़ सकती है और आसमान धुंधला, नारंगी या लालिमा लिए दिखाई दे सकता है. अमेरिका के कैलिफोर्निया और दूसरे जंगलों में आग लगने के दौरान ऐसी घटनाएं देखी गई हैं. हालांकि, दंतेवाड़ा में वायरल लाल आसमान के पीछे जंगलों की आग का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. इसलिए इसको घटना की वजह बताना सही नहीं होगा. बादल भी आसमान के रंग को प्रभावित करते हैं. खासकर जब आसमान में घने बादल हों और सूर्य क्षितिज के करीब हो. बादलों में पानी की बेहद छोटी बूंदें और बर्फ के क्रिस्टल होते हैं. ये सूर्य की रोशनी को अलग-अलग दिशाओं में बिखेरते हैं. जब सूर्य की लाल या नारंगी रोशनी बादलों पर पड़ती है, तो बादल भी उसी रंग में चमकने लगते हैं. कई बार घने काले बादलों के बीच से सूर्य की रोशनी निकलती है. इससे आसमान में लाल, नारंगी और पीले रंग का असामान्य मिक्सचर दिखाई देता है. तूफान के समय बादलों की ऊंचाई, मोटाई, दिशा और सूर्य की स्थिति तेजी से बदल सकती है. इस कारण आसमान का रंग भी कुछ समय के लिए असामान्य हो सकता है. लेकिन सिर्फ बादलों के मौजूद होने से पूरे आसमान का गहरा लाल होना जरूरी नहीं है. इसके लिए प्रकाश की दिशा और वातावरण में मौजूद कणों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है. आसमान का लाल दिखाई देना अपने आप में किसी प्राकृतिक आपदा या विनाश का संकेत नहीं है. यह वातावरण में प्रकाश के बिखरने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया हो सकती है. हालांकि अगर इसके साथ तेज हवाएं, धूल भरी आंधी, गरज-चमक और भारी बारिश हो रही हो, तो लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए. QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें

