रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने मंगलवार को कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद का अगला सत्र राज्य के बस्तर क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा जो भारत के दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों को राष्ट्रीय नीति-निर्धारण की मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा.

बस्तर क्षेत्र नक्सलवाद का गढ़ बना हुआ है जिसमें सात जिले बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा शामिल हैं. हालांकि, केंद्र ने मार्च 2026 के अंत तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य रखा है. छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बयान में कहा कि वाराणसी में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा में यह पुष्टि की गई कि परिषद का अगला सत्र बस्तर में होगा. इसमें कहा गया कि इस फैसले को देश के दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण अंचलों को राष्ट्रीय नीति-निर्धारण की मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा जा रहा है.

अधिकारियों ने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्र में इस स्तर की बैठक का आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समावेशी विकास और सुशासन की नीति का सशक्त प्रतीक है. उन्होंने बताया, ”बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने आशा व्यक्त की कि परिषद की अगली बैठक तक बस्तर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय और निर्णायक प्रगति हो चुकी होगी. इस विश्वास के साथ, परिषद ने बस्तर क्षेत्र को शांति, स्थायित्व और विकास के एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने का लक्ष्य रखा है.” छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि बस्तर में इस तरह की उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन न केवल क्षेत्र के लिए गौरव की बात है, बल्कि इससे वहां के विकास को नयी ऊर्जा भी प्राप्त होगी.

उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से बस्तर अब संघर्ष का नहीं, संभावनाओं का प्रतीक बनने की ओर अग्रसर है.
अधिकारियों ने बताया कि केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को वाराणसी में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक की अध्यक्षता की.

उन्होंने बताया कि बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भाग लिया. अधिकारियों ने बताया कि बैठक में सदस्य राज्यों के वरिष्ठ मंत्री, केंद्रीय गृह सचिव, अंतर-राज्य परिषद सचिवालय के सचिव, सदस्य राज्यों के मुख्य सचिव और राज्यों तथा केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए.

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