राष्ट्रवाणी: सोशल मीडिया की सबसे बड़ी कंपनी Meta एक बार फिर से अपने यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर बड़ी मुसीबत में फंस गई है. Facebook और Instagram चलाने वाली इस पेरेंट कंपनी को अब अपनी गलती की वजह से एक बहुत ही तगड़ा झटका लगा है. खबरों की मुताबिक यूजर्स के Personal Data के साथ खिलवाड़ करने और बिना इजाजत जानकारी इस्तेमाल करने के मामले में Meta ने सेटलमेंट करने का फैसला किया है. इस समझौते के तहत कंपनी को भारी रकम चुकानी पड़ रही है. जिसे टेक की दुनिया के सबसे बड़े प्राइवेसी फाइन में से एक माना जा रहा है. Phone चलाने वाले करोड़ों लोगों को अंदाजा भी नहीं होता कि Background में हमारे Data के साथ क्या खेल चल रहा है. इसी मनमानी पर लगाम लगाने के लिए रेगुलेटर्स ने यह सख्त कदम उठाया है. जिससे Mark Zuckerberg की कंपनी को तगड़ा नुकसान होने जा रहा है. आपको बता दें यह पूरा मामला आज का नहीं है बल्कि इसके तार पिछले कई सालों से जुड़े हुए हैं. Meta पर बार-बार यह आरोप लगते रहे हैं कि कंपनी अपने करोड़ों यूजर्स के Personal Data को थर्ड पार्टी Apps और Advertizers के साथ बिना किसी ठोस Security के शेयर करती है. लोग जब Facebook या Instagram पर अपनी Location, Likes, Photo या Personal Chat करते हैं. तो कंपनी के एल्गोरिदम उस Data को ट्रैक करके पैसे कमाने के लिए इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा फेशियल रिकग्निशन यानी चेहरे की पहचान करने वाले डेटा को भी बिना यूजर्स की परमिशन के स्टोर करने का बड़ा मुद्दा सामने आया था. जब इस बात का खुलासा हुआ तो दुनिया भर के यूजर्स और प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और कोर्ट में केस दर्ज कर दिया. सालों तक चली इस लंबी कानूनी लड़ाई में Meta ने खुद को बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन सबूत इतने पक्के थे कि कंपनी के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा. अब सवाल यह उठता है कि आखिर Meta जैसी दिग्गज कंपनी ने कोर्ट में केस लड़ने के बजाय सेटलमेंट का रास्ता क्यों चुना. दरअसल अगर यह ट्रायल और लंबा खिंचता तो कंपनी के कई और अंदरूनी राज पब्लिक के सामने आ सकते थे. जिससे Meta की बची-खुची इमेज भी खराब हो जाती. इसके अलावा कंपनी के टॉप अधिकारियों और खुद Mark Zuckerburg को कोर्ट में सवालों के जवाब देने पड़ते. शेयर मार्केट में कंपनी के स्टॉक्स पर भी इस केस का बुरा असर पड़ रहा था और इन्वेस्टर्स में एक डर का माहौल बन गया था. इसलिए कंपनी के वकीलों और बोर्ड मेंबर्स ने यही समझदारी समझी कि जुर्माने की भारी-भरकम रकम देकर इस चैप्टर को यहीं हमेशा के लिए बंद कर दिया जाए. हालांकि Meta ने इस सेटलमेंट के दौरान सीधे तौर पर अपनी गलती कबूल नहीं की है. बल्कि इसे सिर्फ अपने यूजर्स और बिजनेस के हित में लिया गया एक प्रैक्टिकल फैसला बताया है. इस ऐतिहासिक समझौते और भारी जुर्माने के बाद अब आम Internet यूजर्स के मन में यही सवाल है कि क्या अब हमारा डेटा पूरी तरह से सेफ हो जाएगा. इस डील के तहत सिर्फ पैसे देने की बात नहीं है बल्कि Meta को अपने Privacy Tools और Data Handling के तरीकों में बड़े बदलाव करने का भी सख्त आदेश मिला है. अब कंपनी को किसी भी यूजर का Data ट्रैक करने से पहले आसान भाषा में परमिशन लेनी होगी न कि लंबी-चौड़ी टर्म्स एंड कंडीशंस में उलझाकर. इसके साथ ही जिन यूजर्स का Data इस दौरान गलत तरीके से इस्तेमाल हुआ है. उन्हें इस सेटलमेंट फंड में से मुआवजा मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है. यह फैसला सिर्फ Meta के लिए ही नहीं बल्कि गूगल, एप्पल और X जैसी तमाम बड़ी टेक कंपनियों के लिए एक कड़ा सबक है कि अब यूजर्स की Privacy को हल्के में लेना उन्हें बहुत महंगा पड़ सकता है. नीलेश ओझा एबीपी न्यूज़ में कार्यरत हैं और फिलहाल टेक बीट संभाल रहे हैं. इससे पहले वह स्पोर्ट्ज़विकी और क्रिकएडिक्टर में सब एडिटर, इनशॉर्ट्स में हिंदी कंटेट स्पेशलिस्ट और ज़ी हिंदुस्तान और ज़ी राजस्थान में काम कर चुके हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने कई क्रिकेट मैच कवर किए हैं और क्रिकेट लाइव स्ट्रीमिंग भी होस्ट की है. न्यूज़ और खेल के साथ नीलेश की दिलचस्पी गीत लेखन में भी है. पिछले साल उनके लिखे एक गीत को बॉलीवुड सिंगर अर्नब दत्ता की आवाज़ में रिलीज़ किया गया. पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने मुरैना के अंबाह पीजी कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से डिजिटल जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा किया है. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.
Trending
- मृत्यु के बाद भी दूसरों के जीवन में उजाला लाने की मिसाल बने 23 वर्षीय यश गुप्ता—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – राष्ट्रवाणी
- 17 वर्ष से अधिक तथा 18 वर्ष एवं छूटे हुए मतदाताओं को मतदाता सूची में जोड़ने जगह-जगह लगाए जा रहे शिविर – राष्ट्रवाणी
- राज्योत्सव समारोह-2026 के सफल आयोजन के लिए नोडल और सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त – राष्ट्रवाणी
- लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन संयुक्त जिला कार्यालय भवन और पीडब्लूडी आवासीय परिसर का किया निरीक्षण – राष्ट्रवाणी
- कैंसर की समय पर पहचान के लिए जिला अस्पताल में लगा निःशुल्क शिविर—जानें पूरा मामला – राष्ट्रवाणी
- खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा दीपावली के अवसर पर खाद्य पदार्थों की सघन जांच जारी—जानें पूरा मामला – राष्ट्रवाणी
- छत्तीसगढ़ की केशकाल घाटी में पेड़ से टकराई बोलेरो, सेना के जवान की मौत, साथी समेत पांच घायल – राष्ट्रवाणी
- रेलटेल को म्यूनिशन्स इंडिया – भारतीय पीएसयू से 20.04 करोड़ रुपये का क्यू-शक्ति आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर अनुबंध मिला

