नयी दिल्ली: केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना ‘मिशन अमृत सरोवर’ के पहले चरण के तहत देशभर में अब तक 68,000 से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण या पुनरुद्धार किया जा चुका है और यह पहल देश के विभिन्न क्षेत्रों में जल संकट से निपटने और भूजल तथा सतही जल उपलब्धता बढ़ाने में अहम साबित हुई है।

राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने बताया कि ‘मिशन अमृत सरोवर’ अप्रैल 2022 में शुरू किया गया था। उनके अनुसार, इस मिशन का उद्देश्य दिल्ली, चंडीगढ़ और लक्षद्वीप को छोड़कर प्रत्येक ग्रामीण जिले में 75 अमृत सरोवर का निर्माण या पुनरुद्धार करना था। मिशन का लक्ष्य 15 अगस्त 2023 तक कुल 50,000 सरोवर तैयार करना था, ताकि भविष्य की पीढि़यों के लिए जल संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

मंत्री ने कहा कि यह पहल देश के विभिन्न क्षेत्रों में जल संकट से निपटने और भूमिगत तथा सतही जल उपलब्धता बढ़ाने में कारगर साबित हुई है। इन सरोवरों ने तत्काल जल जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ स्थायी जल स्रोत भी प्रदान किए हैं, जो सरकार की दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता और सामुदायिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

पासवान ने कहा कि अब मिशन का दूसरा चरण शुरू किया गया है, जिसमें जनभागीदारी को केंद्र में रखते हुए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने, जलवायु लचीलापन बढ़ाने और पारिस्थितिक संतुलन को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया है। इसके लिए सभी भागीदार मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ संशोधित दिशा-निर्देश साझा किए गए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि मिशन के प्रभाव का आकलन करने के लिए दो अध्ययन कराए गए। उनके अनुसार ‘‘आईआईटी दिल्ली के अध्ययन में पाया गया कि मिशन के पहले चरण में जलाशयों की सतह क्षेत्रफल में 16.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और सूखे जलाशयों में 42 प्रतिशत की कमी आई है, जो जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन शमन में मिशन की भूमिका को दर्शाता है। जीआईजेड इंडिया के एक अन्य अध्ययन में बताया गया कि मिशन के चलते भूजल स्तर, कृषि, जैव विविधता और आजीविका में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।’’

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संपादक : नीरज दीवान

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