नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को जेन-जी विरोध प्रदर्शनों में कथित भूमिका के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके साथ ही पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई नई सरकार के गठन के तुरंत बाद हुई है, जिससे राजनीतिक माहौल में हलचल तेज हो गई है।
जेन-जी आंदोलन और हिंसा
सितंबर 2024 में नेपाल में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें जेन-जी आंदोलन कहा गया। यह आंदोलन अचानक हिंसक मोड़ ले गया और दो दिनों के अंदर 70 से अधिक लोग मारे गए। इस हिंसा ने देश की राजनीति को हिला कर रख दिया और ओली सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। जांच रिपोर्ट में आरोप लगाए गए हैं कि उच्च पदस्थ अधिकारियों ने
हालात संभालने में लापरवाही की।
जांच और गिरफ्तारीहाल ही में गठित उच्च स्तरीय जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ओली और रमेश लेखक समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने निर्दोष लोगों की मौत के लिए जिम्मेदारी ली है। रिपोर्ट में अधिकतम 10 साल की सजा का भी सुझाव दिया गया था। इसके आधार पर नई सरकार ने आरोपियों को गिरफ्तार करने का निर्णय लिया है। ओली ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है और
कानूनी लड़ाई लड़ने का संकेत दिया है।
सरकार का रुख और आगे की कार्रवाईनई गृहमंत्री सुदन गुरूंग ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, और इस कदम का मकसद न्याय सुनिश्चित करना है। रिपोर्ट में पुलिस के तत्कालीन महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग समेत कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का नाम भी शामिल है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी की संभावना है, जो नेपाल की राजनीति और न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी परीक्षा होगी।
