रायपुर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षा की कमी को दूर करने और विकास कार्यों को सुगम बनाने के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के दो नये शिविर स्थापित किए गए हैं. पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी.

बीजापुर के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इसके साथ ही जनवरी 2024 से अब तक जिले में 36 सुरक्षा शिविर स्थापित किए जा चुके हैं. इस अवधि के दौरान 193 माओवादियों को मार गिराया गया, 496 ने आत्मसमर्पण किया और 900 लोगों को गिरफ्तार किया गया. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नियाद नेला नार’ योजना के तहत ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा प्रदान करके के उद्देश्य से इन शिविरों की स्थापना की जा रही है.

अधिकारी ने बताया कि जिला पुलिस और सीआरपीएफ ने उल्लूर गांव में नौ सितंबर को एक ‘सुरक्षा एवं जन सुविधा शिविर’ स्थापित किया था जबकि दूसरा शिविर 11 सितंबर को चिल्लामरका गांव में स्थापित किया गया. दोनों गांव भोपालपटनम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं. अधिकारी ने बताया कि उल्लूर में स्थित शिविर सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन का अग्रिम परिचालन बेस होगा और दूसरा शिविर 22वीं बटालियन का होगा.

अधिकारी ने बताया कि प्रतिकूल मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दो नये शिविरों की सफलतापूर्वक स्थापना की. उन्होंने बताया कि यह कदम न केवल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि इससे क्षेत्रीय विकास को भी रफ्तार मिलेगी.

ये शिविर भोपालपटनम को फरसेगढ़, सांद्रा (बीजापुर में) और गढ़चिरौली (पड़ोसी महाराष्ट्र में) से जोड़ने में मदद करेगा और माओवादियों की अंतर-राज्यीय गतिविधियों पर रोक लग पाएगी. अधिकारी ने बताया कि इससे इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के गांवों को जोड़ने के लिए सड़कों का निर्माण किए जाने में भी मदद मिलेगी. अधिकारी ने बताया कि इन शिविरों से ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पेयजल, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकानों, मोबाइल नेटवर्क, सड़कों और पुलों तक पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.

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