नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय स्वत: संज्ञान लेते हुए एक मामले की सोमवार को सुनवाई करेगा, जिसमें जांच एजेंसियों द्वारा उन वकीलों को तलब करने का मुद्दा शामिल है जो पक्षकारों को राय देते हैं और मुकदमों में उनका प्रतिनिधित्व करते हैं. प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी.

यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा वरिष्ठ वकीलों अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को तलब किए जाने के मद्देनजर आया है. हालांकि, 20 जून को ईडी ने अपने जांच अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे उन वकीलों को समन जारी नहीं करें जिनके मुवक्किलों के खिलाफ धन शोधन जांच की जा रही है. वकीलों ने केयर हेल्थ इंश्योरेंस लिमिटेड को रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की पूर्व अध्यक्ष रश्मि सलूजा को दी गई कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व योजना पर कानूनी सलाह दी थी.

‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ (एससीबीए) और ‘सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन’ (एससीएओआरए) ने इस समन की निंदा की और इसे ”परेशान करने वाली प्रवृत्ति” बताया जिसने कानूनी पेशे की नींव पर प्रहार किया है. बार संघों ने प्रधान न्यायाधीश से इस मामले का स्वत? संज्ञान लेने का आग्रह किया था. यह आदेश शीर्ष अदालत द्वारा गुजरात के एक वकील की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें 12 जून को दिए गए उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी गई थी.

उच्च न्यायालय ने मार्च 2025 में मुवक्किल के खिलाफ एक मामले में उसके वकील को पुलिस के समक्ष तलब करने संबंधी नोटिस को रद्द करने से इनकार कर दिया था. हालांकि, शीर्ष अदालत ने राज्य को अगले आदेश तक वकील को तलब न करने का निर्देश दिया और जारी पुलिस नोटिस के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी.

इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए पीठ ने अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और एससीबीए और एससीएओआरए के अध्यक्षों से सहायता का आग्रह किया. शीर्ष अदालत ने रजिस्ट्री से कहा था कि वह उचित निर्देश पारित करने के लिए मामले से जुड़ीं सभी फाइल प्रधान न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करे.

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version