Pakistan: पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अल्पसंख्यक हिंदू स्कूली छात्राओं को पढ़ाई जारी रखने के लिए इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया। इसकी शिकायत के बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि नवंबर अंत में सिंध के मीरपुर साक्रो में स्थित सरकारी हाई स्कूल की कुछ हिंदू छात्राओं के माता-पिता ने मीडिया को बताया था कि प्रधानाध्यापिका ने हिंदू छात्राओं से कहा था कि वे अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए इस्लाम धर्म अपना लें।

माता-पिता ने आरोप लगाया कि हिंदू छात्राओं को कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया और हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया गया। इस घटना से आक्रोश फैल गया। छात्राओं के माता-पिता का कहना है कि इस्लाम धर्म अपनाने या कलमा पढ़ने से इन्कार करने पर छात्राओं को उनके घर लौटा दिया गया।

शिक्षा मंत्री ने बनाई समिति, दर्ज किए बयान
धार्मिक मामलों के राज्यमंत्री खीसो मल खील दास ने बृहस्पतिवार को संसद के उच्च सदन सीनेट को बताया कि प्रांतीय शिक्षा मंत्री ने इस मामले की जांच का आदेश दिया है। सिंध के शिक्षा मंत्री सैयद सरदार अली शाह के एक प्रवक्ता ने बताया कि मीरपुर साक्रो का दौरा करने व सच्चाई का पता लगाने के लिए एक समिति बनाई गई है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि समिति सदस्यों ने प्रभावित छात्रों, उनके माता-पिता, प्रधानाध्यापिका और अन्य शिक्षकों के बयान दर्ज कर लिए हैं। किसी को भी जबरन धर्म परिवर्तन कराने के लिए दबाव या धमकियों का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है।

आम है अल्पसंख्यक लड़कियों का जबरन अपहरण, धर्मांतरण व शादी
गौरतलब है कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू आबादी सबसे ज्यादा है। इनमें ज्यादातर कम आयवर्ग के लोग हैं। यहां अल्पसंख्यक नाबालिग लड़कियों का अपहरण करके उनकी बड़ी उम्र के लोगों के साथ जबरन शादी करवा दी जाती है। मानवाधिकार समूह का अनुमान है कि हर साल लगभग 1,000 से ज्यादा अपल्संख्यक लड़कियों को अगवा कर उनका जबरन धर्मांतरण करवाया जाता है। इसके बाद उनकी जबरन बड़ी उम्र के लोगों के साथ शादी करवा दी जाती है। इनमें भी अधिक संख्या दलित हिंदू लड़कियों की होती है।

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