राष्ट्रवाणी: सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार में अधिक भागीदारी की अनुमति दी है, जिसका उद्देश्य बाजार …और पढ़ें सेबी ने FPI को कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार में अनुमति दी। लक्ष्य: बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाना और विदेशी निवेश आकर्षित करना।

FPI को वास्तविक डिलीवरी प्रक्रिया से बाहर रहना होगा। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| बाजार में लिक्विडिटी मजबूत करने और विदेशी कारोबारियों के इन्वेस्टमेंट बढ़ाने के लिए SEBI ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार में ज्यादा हिस्सेदारी की अनुमति दे दी है। इस फैसले का मकसद कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार में कारोबार बढ़ाना और लिक्विडिटी को मजबूत करना है।

SEBI बोर्ड ने विदेशी निवेशकों को गैर-कृषि कमोडिटी इंडेक्स डेरिवेटिव्स में कारोबार की मंजूरी दी है। इसके अलावा, वे उन गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव्स में भी ट्रेड कर सकेंगे जिनमें कॉन्ट्रैक्ट की समाप्ति पर वास्तविक माल की डिलीवरी होती है। हालांकि, SEBI ने इसके लिए कुछ शर्तें भी तय की हैं।

विदेशी निवेशकों को ऐसी सभी पोजिशन समय रहते बंद करनी होंगी ताकि उन्हें किसी भी तरह की वास्तविक डिलीवरी लेने या देने की जरूरत न पड़े। SEBI के अनुसार, विदेशी निवेशकों को टेंडर पीरियड शुरू होने से पहले अपनी पोजिशन से बाहर निकलना होगा। टेंडर पीरियड किसी भी कॉन्ट्रैक्ट के समाप्त होने से तीन दिन पहले शुरू होता है।

इसके बाद निवेशक अपनी पोजिशन भी नहीं बढ़ा सकेंगे। नियमों के तहत, किसी भी एक्सचेंज पर ट्रेडिंग शुरू करने से पहले FPI को अपने ट्रेडिंग मेंबर या ट्रेडिंग-कम-क्लियरिंग मेंबर के साथ एक समझौता करना होगा। इसमें यह तय होगा कि डिलीवरी की स्थिति आने से पहले निवेशक की खुली पोजिशन को कैसे बंद किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक अगर किसी FPI की कोई पोजिशन टेंडर पीरियड शुरू होने से पहले भी खुली रह जाती है, तो उसे ट्रेडिंग मेंबर या क्लियरिंग मेंबर को ट्रांसफर किया जा सकता है। यह ट्रांसफर उस दिन एक्सचेंज द्वारा घोषित क्लोजिंग प्राइस या सेटलमेंट प्राइस पर होगा। इसके साथ ही SEBI ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की पोजिशन ट्रांसफर को एक ट्रेड माना जाएगा और उस पर लागू सभी कर और शुल्क चुकाने होंगे।

सेबी के निदेशक मंडल ने मान्यता-प्राप्त निवेशकों का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव भी मंजूर किया। इसके तहत SEBI ने बाजार में ₹5 करोड़ की संपत्ति रखने वाले व्यक्ति और ₹20 करोड़ की ऐसी संपत्ति रखने वाली कंपनियां, मौजूदा आय और कुल संपत्ति संबंधी मानदंडों के साथ, मान्यता-प्राप्त निवेशक बनने के पात्र होंगी।

इस कदम का उद्देश्य मान्यता-प्राप्त निवेशकों का दायरा बढ़ाना और वैकल्पिक निवेश कोषों (AIF) में भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। एक्सपर्ट्स के अनुसार इस फैसले से विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे मेटल्स, एनर्जी और अन्य गैर-कृषि कमोडिटी से जुड़े डेरिवेटिव्स बाजार में कारोबार बढ़ सकता है।

इससे कीमतों की खोज बेहतर होगी और बाजार में लिक्विडिटी मजबूत होने की उम्मीद है। SEBI का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार को गहरा बनाना है, जबकि यह भी सुनिश्चित करना है कि विदेशी निवेशक वास्तविक माल की डिलीवरी प्रक्रिया का हिस्सा न बनें।

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