राष्ट्रवाणी: 1998 पीएससी अफसरों की मूल विभाग में वापसी व पदोन्नति पर तीन माह में करें फैसला ट्रायबल विभाग में नियुक्ति के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में स्थानांतरण की मांग, 45 दिन में नया अभ्यावेदन देने की स्वतंत्रता प्रतिनिधि, बिलासपुर: वर्ष 1998 में लोक सेवा आयोग के जरिए अतिरिक्त सहायक विकास आयुक्त के पद पर चयनित अधिकारियों के मूल विभाग में स्थानांतरण, एकीकृत वरिष्ठता सूची और काल्पनिक पदोन्नति के मामले में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपनी मांगों के संबंध में नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी है। अदालत ने कहा है कि यदि याचिकाकर्ता 45 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करते हैं तो शासन उस पर 90 दिनों के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लें। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने मोहित राम कैवर्त सहित 13 अधिकारियों द्वारा दायर रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार वर्ष 1996 में तत्कालीन मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर उनका चयन अतिरिक्त सहायक विकास आयुक्त के पद के लिए हुआ था। वर्ष 1998 में नियुक्ति के समय उन्हें आदिम जाति कल्याण विभाग के अधीन नियुक्त किया गया। अधिकारियों का कहना था कि उनका मूल कार्यक्षेत्र पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित था। इसी आधार पर उन्होंने अपनी सेवाओं को मूल विभाग में स्थानांतरित करने, एकीकृत वरिष्ठता सूची तैयार करने और वरिष्ठता के आधार पर आवश्यक काल्पनिक पदोन्नति देने की मांग की। याचिकाकर्ताओं की ओर से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के अनुराग सक्सेना बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले में दिए गए निर्णय का हवाला दिया कि समान परिस्थितियों वाले अधिकारियों के मामले में पहले ही न्यायिक निर्णय हो चुका है। इसलिए उसी के अनुरूप उनके मामले पर भी विचार किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट से सीमित राहत मांगी गई। उन्होंने आग्रह किया कि शासन को उनके लंबित अभ्यावेदन पर उक्त निर्णय के आलोक में समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने के निर्देश दिया जाए। सरकार ने कहा- कई अधिकारी हो चुके हैं सेवानिवृत्त राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए बताया गया कि वर्ष 2018 से मामला लंबित रहने के दौरान अधिकांश याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में याचिका के वर्तमान स्वरूप में कोई प्रभावी राहत दिए जाने का औचित्य नहीं रह गया है। 45 दिन में नया अभ्यावेदन देने के निर्देश हाई कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम निष्कर्ष व्यक्त किए बिना याचिकाकर्ताओं को नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर अपर मुख्य सचिव, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के समक्ष नया अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। अभ्यावेदन में अपनी मांग के साथ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के अनुराग सक्सेना मामले के निर्णय का भी उल्लेख किया जा सकता है। सक्षम प्राधिकारी अभ्यावेदन प्राप्त होने के बाद 90 दिनों के भीतर कानून के अनुसार उस पर निर्णय करेगा। निर्णय लेते समय अनुराग सक्सेना मामले में निर्धारित विधिक सिद्धांतों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

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