राष्ट्रवाणी (सूरजपुर ब्यूरो): न्यूज, सूरजपुर : शिक्षा विभाग में भर्ती के वर्षों बाद अब शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति और नियमितीकरण की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। प्रेमनगर जनपद पंचायत में वर्ष 2007-08 में हुई शिक्षाकर्मी वर्ग तीन की भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर शिवसेना की महिला इकाई ने मोर्चा खोल दिया है।
महिला इकाई ने कुछ शिक्षकों के शैक्षणिक अंक, अनुभव प्रमाणपत्र और डीएड की योग्यता से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है कि कथित गड़बड़ियों के बावजूद संबंधित शिक्षक वर्षों से नौकरी कर रहे हैं। मामले में प्रेमनगर थाना और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दस्तावेजों के साथ आवेदन सौंपकर नियुक्ति से लेकर वर्ष 2016 में किए गए नियमितीकरण तक की जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है।
शिवसेना महिला इकाई की जिलाध्यक्ष बालकुंवर राजवाड़े ने आवेदन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है कि शासन के निर्देश पर हुई भर्ती प्रक्रिया में कुछ अभ्यर्थियों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की। आरोप है कि इस संबंध में जनपद पंचायत और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायतकर्ता ने संबंधित दस्तावेजों को छिपाने, वेतन आहरण में मदद करने और बिना समुचित सत्यापन के नियमितीकरण किए जाने का आरोप भी लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की मांग की गई है। आवेदन में पांच लोगों की नियुक्तियों का उल्लेख करते हुए अलग-अलग अनियमितताओं का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गया है।
शिकायत के अनुसार एक की वर्ष 2007 में हुई नियुक्ति के मामले में 12वीं की अंकसूची में प्राप्त अंकों और अंतिम चयन सूची में दर्शाए गए अंकों के बीच अंतर होने का दावा किया गया है। एक अन्य के अनुभव प्रमाणपत्र को संदिग्ध बताते हुए कहा गया है कि संबंधित विद्यालय की उपस्थिति पंजी में उनके अध्यापन का उल्लेख नहीं मिलता।
इसी तरह दो महिला शिक्षकों के डीएड प्रमाणपत्रों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आवेदन में दावा किया गया है कि दोनों के प्रमाणपत्रों और वर्ष 2013 में प्रेमनगर में डीएड परीक्षा देने संबंधी विवरणों का मिलान किया जाना चाहिए। शिकायतकर्ता का दावा है कि कुछ अभ्यर्थियों के नाम काउंसलिंग सूची में होने के बावजूद अंतिम चयन सूची में नहीं थे, फिर भी उनकी नियुक्ति हुई।
शिवसेना ने मांग की है कि संबंधित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों, अनुभव प्रमाणपत्रों, चयन सूची, काउंसलिंग रिकॉर्ड और नियमितीकरण से जुड़े दस्तावेजों का निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए। साथ ही, जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित अभ्यर्थियों के साथ चयन समिति और नियुक्ति एवं नियमितीकरण प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए।
आवेदन सौंपने के दौरान शिवसेना जिलाध्यक्ष हेमंत महंत, शिवचरण महंत, अशोक ठाकुर, गोलू देवांगन, लक्ष्मण सिंह, एमडी महंत और संतोष देवांगन सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

