Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र, सुरक्षा और खुशहाली की कामना करती हैं। इसके बदले में भाई अपनी बहन की रक्षा करने और हमेशा साथ देने का वचन देता है। यह त्योहार भाई-बहन के रिश्ते में प्यार और अपनापन बढ़ाने वाला सबसे खास अवसर होता है। आमतौर पर रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल देखा जाता है, जिसे अशुभ माना जाता है और इस समय राखी बांधना टाला जाता है।
भद्रा को शनि की बहन माना जाता है, जिसे यमराज की बहन के रूप में भी जाना जाता है, इसलिए यह समय शुभ नहीं होता। लेकिन इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा काल नहीं रहेगा, जिससे राखी बांधने के लिए अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। फिर भी, राहुकाल जैसे अन्य अशुभ समय का ध्यान रखना जरूरी होता है ताकि यह त्योहार पूरी तरह से शुभ और मंगलमय बन सके।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन के दिन राहुकाल का समय: प्रातः 09: 07 मिनट से लेकर 10:47 मिनट तक रहेगा।
राहुकाल में क्यों न बांधें राखी?
राहुकाल एक अशुभ काल होता है, जो हर दिन एक निश्चित समय तक सीमित रहता है। इस दौरान कोई भी नया या शुभ काम करना मना माना जाता है। राहु एक छाया ग्रह है जिसे चालाक, भ्रमित करने वाला और अनिश्चित परिणाम देने वाला माना जाता है। राहुकाल में किया गया काम अक्सर बाधित हो जाता है या उसका फल ठीक से नहीं मिलता।
रक्षा सूत्र बांधना एक पवित्र और महत्वपूर्ण संस्कार है, इसलिए इसे ऐसे अशुभ समय में करने से उसका प्रभाव कमजोर पड़ सकता है। इसलिए राखी बांधने से पहले भद्रा काल और राहुकाल का खास ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है ताकि यह पर्व पूरी तरह से शुभ और सफल हो सके।
