संभल. कल्कि धाम के पीठाधीश्वर और कांग्रेस के पूर्व नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने संभल हिंसा पर हाल में आई न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि “संभल में हिंदू डरे हुए हैं.” कृष्णम ने शनिवार शाम पत्रकारों से बातचीत में न्यायिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि संभल में केवल 15 प्रतिशत आबादी हिंदू है. उन्होंने आशंका जताई कि अगर 2027 में सरकार बदल गई तो हिंदुओं की संख्या पांच प्रतिशत भी नहीं रह जाएगी.

कृष्णम ने कहा, “संभल में हिंदू डरे हुए हैं. यह घोर अधर्म और अत्याचार का स्थान है. हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत रह गई है.” उन्होंने कहा कि कल्कि धाम, संभल के निवासियों और विशेषकर हिंदुओं की रक्षा करना बहुत महत्वपूर्ण है. वरना, एक दिन ऐसा आएगा जब हिंदू कश्मीर की तरह संभल से भी पलायन कर जाएंगे.” पीठाधीश्वर ने संभल के राजनीतिक नेतृत्व पर, विशेष रूप से पूर्व सांसद दिवंगत डॉ.शफीक-उर-रहमान बर्क पर इस माहौल को बढ़ावा देने का आरोप लगाया.

कृष्णम ने कहा, “डॉ. शफीक-उर-रहमान बर्क ने 40 वर्षों तक यहां शासन किया. हिंदू और मुसलमान एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं और संभल में हुए सभी सांप्रदायिक दंगों के लिए स्थानीय राजनीति ज.म्मिेदार है.” कृष्णम ने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ सरकार के सत्ता में आने के बाद से और खासकर कल्कि धाम के शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे के बाद हालात सुधरे हैं.

उन्होंने कहा, “मैं भारत और उत्तर प्रदेश सरकारों से संभल में हिंदुओं की कड़ी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील करता हूं.” आचार्य ने कहा “संभल इस समय अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के निशाने पर है. प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद से, कल्कि धाम भी निशाने पर है.” सरकारी सूत्रों के अनुसार, नवंबर 2024 में हुई संभल हिंसा पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 1947 के बाद से हर दंगे में हिंदुओं को लगातार मुख्य निशाना बनाया गया है और इस दंगे के दौरान भी वे एक साजिश का केंद्र बने रहे.

मुख्यमंत्री कार्यालय को बृहस्पतिवार को सौंपी गई करीब 450 पन्नों की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश पुलिस को एक “नरसंहार” रोकने का श्रेय दिया गया है और कहा गया है कि दंगाइयों को बाहर से लाया गया था.. सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में बड़े जनसांख्यिकीय बदलावों पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें कहा गया है कि आजादी के समय संभल की नगरपालिका की आबादी में हिंदुओं की संख्या 45 प्रतिशत थी जो घटकर 15 प्रतिशत रह गई है, जबकि अब मुसलमान 85 प्रतिशत हैं.

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