नयी दिल्ली. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मंगलवार को कहा कि पिछले नौ महीनों में भारत-चीन संबंधों में सुधार आया है क्योंकि सीमा पर शांति बनी हुई है. उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा पर तनाव कम करने और संबंधित मुद्दों पर बातचीत की. डोभाल और वांग ने विशेष प्रतिनिधि तंत्र के ढांचे के तहत 24वें दौर की वार्ता की, जिसके एक दिन पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष से मुलाकात की थी.

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारतीय पक्ष ने सीमापार आतंकवाद सहित सभी तरह के आतंकवाद के मुद्दे को दृढ.ता से उठाया और याद दिलाया कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के मूल उद्देश्यों में से एक आतंकवाद की बुराई का मुकाबला करना है.
चीन में आयोजित होने जा रहे वार्षिक एससीओ शिखर सम्मेलन में एक पखवाड़े से भी कम समय बचा है.

बयान में कहा गया कि जयशंकर ने यारलुंग त्सांगपो (ब्रह्मपुत्र नदी) के निचले हिस्से में चीन द्वारा किए जा रहे एक विशाल बांध के निर्माण के संबंध में भारत की चिंताओं को भी रेखांकित किया, क्योंकि इसका निचले तटवर्ती राज्यों पर प्रभाव पड़ेगा. इसमें कहा गया कि इस संबंध में अत्यधिक पारर्दिशता की आवश्यकता को दृढ.ता से रेखांकित किया गया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि विशेष प्रतिनिधि (एसआर) वार्ता में ”तनाव कम करने, परिसीमन और सीमा मामलों” से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई.

वांग सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचे. उनकी यात्रा को दोनों पड़ोसियों द्वारा अपने संबंधों को फिर से सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है. वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए भीषण संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में काफी तल्खी आ गई थी.

टेलीविजन पर प्रसारित अपने आरंभिक संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने विशेष प्रतिनिधि वार्ता के पिछले दौर के लिए पिछले दिसंबर में अपनी बीजिंग यात्रा को याद किया और कहा कि तब से दोनों पक्षों के बीच संबंधों में ”उन्नति की प्रवृत्ति” रही है. उन्होंने कहा, ”सीमाएं शांत हैं, शांति एवं सौहार्द बना हुआ है, हमारे द्विपक्षीय संबंध और अधिक ठोस हो गए हैं.” डोभाल ने औपचारिक रूप से यह भी घोषणा की कि मोदी 31 अगस्त और एक सितंबर को तियानजिन में आयोजित होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन का दौरा करेंगे. उन्होंने कहा कि इस यात्रा के मद्देनजर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता ने ”बहुत विशेष महत्व” हासिल कर लिया है.

डोभाल ने पिछले वर्ष अक्टूबर में रूसी शहर कज़ान में एक बहुपक्षीय कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई वार्ता का भी उल्लेख किया और कहा कि तब से दोनों पक्षों को बहुत लाभ हुआ है. डोभाल ने कहा, ”जो नया माहौल बना है, उससे हमें उन विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ.ने में मदद मिली है, जिन पर हम काम कर रहे थे.” मोदी और चिनफिंग के बीच बैठक भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में शेष दो टकराव बिंदुओं देपसांग और डेमचोक से सैनिकों को पीछे हटाने के समझौते के दो दिन बाद हुई थी.

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए विशेष प्रतिनिधियों के बीच वार्ता सहित कई तंत्रों को पुन: क्रियान्वित करने का निर्णय लिया था. चीनी विदेश मंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि दोनों पक्षों को ”रणनीतिक संचार के माध्यम से आपसी विश्वास बढ.ाना चाहिए, आदान-प्रदान और सहयोग के माध्यम से साझा हितों का विस्तार करना चाहिए, तथा सीमाओं पर विशिष्ट मुद्दों का उचित ढंग से समाधान करना चाहिए.” वांग ने कहा, ”हम यह देखकर प्रसन्न हैं कि अब सीमाओं पर स्थिरता बहाल हो गई है.” उन्होंने कहा, ”अब द्विपक्षीय संबंधों में सुधार और विकास का एक महत्वपूर्ण अवसर है. चीनी पक्ष हमारे निमंत्रण पर एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री की चीन यात्रा को बहुत महत्व देता है.” विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि दोनों विदेश मंत्रियों के बीच चर्चा में साझा हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई.

इसने कहा कि भारतीय पक्ष ने सीमापार आतंकवाद सहित सभी तरह के आतंकवाद के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया तथा याद दिलाया कि एससीओ के मूल उद्देश्यों में से एक आतंकवाद की बुराई का मुकाबला करना था. मंत्री वांग ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आतंकवाद का मुकाबला करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए. विशेष प्रतिनिधि वार्ता में दोनों पक्षों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और सौहार्द बनाए रखने पर विचार-विमर्श किया.

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