दुर्ग, 29 अप्रैल 2026। शासकीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने और आचरण नियमों के विरुद्ध व्यावसायिक गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप में दुर्ग संभाग आयुक्त श्री सत्य नारायण राठौर ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, घुमका (राजनांदगांव) में पदस्थ व्याख्याता श्री सहदेव बारले को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

ज्ञात हो कि श्री बारले पर आरोप था कि उन्होंने शिक्षण कार्य छोड़कर एलआईसी एजेंट के रूप में कार्य करने, क्रिप्टो करेंसी और नेटवर्क मार्केटिंग जैसी गतिविधियों में सक्रिय रहने के साथ-साथ ’मनी बैंक’ योजना के तहत निवेश के लिए सोशल मीडिया पर स्टेटस लगाकर लोगों को प्रेरित किया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, छुईखदान (जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) निर्धारित किया गया है। निलंबन की अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
उल्लेखनीय है कि जांच प्रतिवेदन के अनुसार, श्री बारले के विरुद्ध शिकायत मिलने पर संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा) द्वारा गंभीरता से जांच कराई गई थी। जांच में यह प्रमाणित हुआ कि वे न केवल एलआईसी एजेंट के रूप में कार्य कर रहे थे, बल्कि नेटवर्क मार्केटिंग की बैठकों में भी शामिल होते थे। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता के पुत्र द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि श्री बारले ने एक निजी कंपनी में लाखों रुपये निवेश करने हेतु प्रेरित किया था, जिसमें पैसा डूब जाने के कारण मानसिक तनाव के चलते संबंधित व्यक्ति का निधन हो गया। प्रकरण के सूक्ष्म परिशीलन में पाया गया कि श्री बारले शासकीय सेवा में आने के बाद भी लगभग 12 वर्षों तक एलआईसी एजेंट के रूप में सक्रिय रहे, जिसे उन्होंने स्वयं भी स्वीकार किया है। इसके साथ ही, श्री बारले पर शाला विकास एवं प्रबंधन समिति के नियमों की अनदेखी करने का भी गंभीर आरोप है। उन्होंने समिति के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों को दरकिनार कर अपनी मर्जी से समानांतर बैठकें आयोजित कीं और स्वैच्छाचारिता दिखाते हुए कनिष्ठ व्याख्याता होने के बावजूद स्वयं को प्रभारी प्राचार्य बनाने हेतु पत्राचार किया। संभाग आयुक्त श्री राठौर ने इन कृत्यों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 03 और नियम 16 के विपरीत मानते हुए यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

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