टी-20 क्रिकेट की तथाकथित ‘सुपरपावर’ और दो बार की वर्ल्ड चैंपियन भारतीय टीम ने जापान जैसी अदनी और 41वीं रैंकिंग वाली टीम के सामने जो तमाशा खड़ा किया है, उसने देश का सिर शर्म से झुका दिया है। एशियन गेम्स से ठीक पहले खेले गए एक दोस्ताना मुकाबले में भारतीय सूरमाओं की फुसफुसाती ‘स्टार पावर’ की धज्जियां उड़ गईं। जिस टीम को भारत को एकतरफा रौंदना चाहिए था, उसी जापान के खिलाफ भारतीय टीम किसी तरह गिड़गिड़ाते हुए महज 2 रन से हार टाल सकी।

नाम बड़े और दर्शन छोटे: श्रेयस, अभिषेक और सैमसन की खुली पोल

डिप्लोमेटिक रिश्तों के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाने गई भारतीय टीम ने मैदान पर जो घटिया प्रदर्शन किया, वह किसी काली स्याही से कम नहीं है। 5-5 ओवर के इस मैच में भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। कप्तान श्रेयस अय्यर के बनाए महज 16 रन ही सबसे बड़ा स्कोर रहे, जबकि अभिषेक शर्मा शून्य (0) पर दफा हो गए। संजू सैमसन (9) और ईशान किशन (3) ने अपनी नाकामी से एक बार फिर साबित कर दिया कि जब जिम्मेदारी निभाने की बात आती है, तो ये कागजी शेर पूरी तरह से फुस्स हो जाते हैं। 4 विकेट खोकर सिर्फ 32 रन बनाना किसी गली-मोहल्ले की टीम के प्रदर्शन जैसा है।

अक्षर पटेल न होते तो होती ऐतिहासिक फजीहत

जीत के लिए 33 रन का मामूली लक्ष्य पीछा करने उतरी जापानी टीम ने भारतीय गेंदबाजी की बखिया उधेड़ कर रख दी। आखिरी ओवर में जब जापान को जीत के लिए सिर्फ 8 रन चाहिए थे, तब भारत की सांसें अटकी हुई थीं। यह तो कहिए कि स्पिनर अक्षर पटेल ने गिरते-पड़ते 5 रन देकर भारत को इस सदी की सबसे बड़ी बेइज्जती से बचा लिया, वरना 41वें नंबर की टीम के हाथों भारत की हार तय थी।

200वीं जीत और नंबर-1 रैंकिंग का खोखला जश्न

मैच के बाद आंकड़े भले ही चिल्ला-चिल्लाकर कहें कि भारत टी-20 में 200 जीत दर्ज करने वाली पहली टीम बन गया है और फिर से नंबर-1 टी-20 टीम बन गया है, लेकिन इस खोखले रिकॉर्ड के पीछे की शर्मनाक हकीकत छुप नहीं सकती। जापान जैसी अनुभवहीन टीम से 2 रन की भीख जैसी जीत हासिल करके नंबर-1 बनने वाली इस टीम को जश्न मनाने के बजाय अपनी घटिया बल्लेबाजी और दिशाहीन प्रदर्शन पर डूब मरना चाहिए।



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