राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रस्तावित ‘तिरंगा शक्ति फेस्ट-2026’ प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। जिला प्रशासन के प्रोजेक्ट संस्कृति और रायपुर नगर निगम के कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के लिए प्रतिभागियों से 249 से 599 रुपये तक पंजीयन शुल्क निर्धारित किए जाने पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इसे राष्ट्रीय पर्व की भावना के विपरीत बताते हुए शुल्क को मनमाना करार दिया है। उनका कहना है कि देशभक्ति से जुड़े आयोजनों में आर्थिक स्थिति के आधार पर किसी बच्चे की भागीदारी नहीं रोकी जानी चाहिए। दूसरी ओर आयोजन के पोस्टर में शुल्क का स्पष्ट उल्लेख होने के बावजूद महापौर मीनल चौबे ने कहा है कि नगर निगम के किसी भी कार्यक्रम में प्रतिभागियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर शुल्क तय किसने किया और इसकी अनुमति किस स्तर पर दी गई। निगम के संस्कृति विभाग अध्यक्ष अमर गिदवानी द्वारा कार्यक्रम का विवरण जारी कर प्रतिभागियों से रजिस्ट्रेशन शुल्क की मांग की गई है। आयोजन के प्रचार पोस्टर और प्रेस विज्ञप्ति में एकल प्रतियोगिता के लिए 249 रुपये, युगल के लिए 349 रुपये और छह सदस्य तक के समूह के लिए 599 रुपये पंजीयन शुल्क का उल्लेख किया गया है। वहीं महापौर मीनल चौबे ने स्पष्ट कहा कि नगर निगम के किसी भी कार्यक्रम में प्रतिभागियों से शुल्क नहीं लिया जाएगा। यदि ऐसा तय किया गया है तो उसकी समीक्षा कर उसे निरस्त किया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर प्रतिभा को मंच मिलना चाहिए, न कि शुल्क की शर्त। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे केवल शुल्क के कारण प्रतियोगिता से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों और जरूरतमंद बच्चों के लिए निश्शुल्क प्रवेश की मांग करते हुए इसे जनभागीदारी के बजाय शुल्क आधारित आयोजन बताया। विवाद का दूसरा बड़ा सवाल यह है कि पंजीयन शुल्क तय करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया। विपक्ष ने पूछा है कि क्या इसके लिए नगर निगम की सामान्य सभा, कला केंद्र संचालन समिति या जिला प्रशासन की औपचारिक स्वीकृति ली गई थी। यदि यह संयुक्त आयोजन है तो शुल्क निर्धारण का अधिकार किसके पास था, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। 14 अगस्त : शहीद स्मारक भवन में भव्य फिनाले प्रतियोगिताएं : एकल एवं समूह गायन, नृत्य, चित्रकला, फैंसी ड्रेस, कविता पाठ, वाद्य संगीत और बैंड प्रस्तुति। सभी प्रस्तुतियां देशभक्ति, भक्ति और शास्त्रीय विषयों पर आधारित रहेंगी। विजेताओं को पुरस्कार और सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे। राष्ट्रीय पर्व के आयोजन में शुल्क क्यों? क्या आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाएं पीछे छूट जाएंगी? जब महापौर शुल्क से इनकार कर रही हैं तो पोस्टर में राशि कैसे दर्ज हुई? क्या आयोजकों के बीच समन्वय की कमी है या निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव? अब सबकी नजर इस पर है कि शुल्क वापस लिया जाता है या नहीं।

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