कोलकाता. केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर सीमा पार से घुसपैठियों को राज्य में बसने में मदद करने का आरोप लगाया. यादव ने यह भी आरोप लगाया कि 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से राज्य में महिलाओं पर हमले की घटनाएं बढ़ गई हैं. उन्होंने यह बात नरेन्द्र मोदी सरकार के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कही.

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया, ”राज्य सरकार विदेशी नागरिकों के निर्वासन में सहयोग नहीं कर रही है. उल्टा, तृणमूल कांग्रेस घुसपैठियों को इस देश का निवासी बनाने में मदद कर रही है. राज्य सरकार की तुष्टीकरण की नीति के कारण अपराध की घटनाएं चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई हैं.” उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, लेकिन बंग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने के लिए राज्य अपना काम नहीं कर रहा. संबंधित कानूनों को लागू करने की आवश्यकता है, लेकिन राजनीतिक कारणों से ऐसा नहीं किया जा रहा है.

जब उनसे पूछा गया कि क्या अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सकता है, तो यादव ने कहा, “निर्वाचन आयोग किसी भी पार्टी द्वारा धांधली के किसी भी प्रयास को विफल करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगा.” ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के एक वर्ग द्वारा की गई कथित प्रतिकूल टिप्पणियों के बारे में उन्होंने कहा कि देश की पश्चिमी सीमा के उस पार स्थित आतंकी ठिकानों पर किए गए सटीक हमले हमारे सशस्त्र बलों की वीरता का परिणाम हैं.

उन्होंने कहा, ”पूरी दुनिया ने भारतीय सेना की शक्ति देखी है. तृणमूल कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों के नेता पाकिस्तान से फैल रहे आतंकवाद के खिलाफ सरकार के वैश्विक अभियान के तहत विभिन्न देशों में भेजे गए प्रतिनिधिमंडलों में शामिल थे.” केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”अब अगर वह (ममता बनर्जी) कहती हैं कि उन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम पसंद नहीं है, तो यह बेहद अफसोस की बात है. ऐसी चीजों को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए.” पश्चिम बंगाल में 2021 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा और 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और अन्य विपक्षी कार्यकर्ताओं पर हमले के आरोपों के बारे में पूछे गए सवाल पर यादव ने कहा कि इन घटनाओं के अलावा आम लोगों पर हमलों की संख्या में भी वृद्धि हुई है.

उन्होंने कहा, ”मुर्शिदाबाद के बारे में सोचिए, मालदा के बारे में सोचिए, संदेशखालि के बारे में सोचिए. यह राष्ट्रीय शर्म की बात है कि एक महिला मुख्यमंत्री की अगुवाई वाली सरकार ने उस समय आंखें मूंद लीं, जब महिलाओं को इन स्थानों पर क्रूरता और अत्याचार का सामना करना पड़ रहा था.” अप्रैल में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में मुर्शिदाबाद जिले के कई हिस्सों में हिंसा हुई थी और कई परिवार पड़ोसी मालदा जिले में भाग गए थे. हिंसा में तीन लोग मारे गए थे.

दक्षिण 24 परगना जिले के संदेशखाली क्षेत्र में पिछले साल फरवरी में तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख और उसके समर्थकों के खिलाफ यौन शोषण और जमीन हड़पने के आरोपों को लेकर प्रदर्शन हुए थे. बाद में शाहजहां शेख को गिरफ्तार भी किया गया था.
यादव ने कहा, “बंगाल में एक भी महीना ऐसा नहीं गुजरता जब महिलाओं पर हमलों की खबरें न आती हों. जब मुर्शिदाबाद में लोगों के घर जलाए जा रहे थे और महिलाएं एवं बच्चे हिंसा का शिकार हो रहे थे, तब इस प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की.” केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने कहा कि राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने और लोगों को सुरक्षा प्रदान करने में मदद करना केंद्र पर छोड़ दिया गया है.

उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी का 14 साल का शासन कुशासन से भरा है. विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ चुनाव बाद की हिंसा के बारे में उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि बंगाल के लोग 2026 में करारा जवाब देंगे.” राज्य में अगले साल (2026 में) विधानसभा चुनाव होने हैं. यादव ने एसएससी नियुक्ति घोटाले और करीब 26,000 शिक्षकों की नौकरी जाने का मुद्दा भी उठाया. यादव ने राज्य सरकार पर ‘आयुष्मान भारत’ जैसी केंद्रीय परियोजनाओं को लागू नहीं करने और लोगों को इससे वंचित रखने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “लोगों ने तृणमूल कांग्रेस सरकार के विश्वासघात को देख लिया है.”

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