राष्ट्रवाणी: अमेरिकी सरकार द्वारा इमिग्रेशन प्रोग्राम सस्पेंड करने के फैसले के बाद TCS ने कहा है कि इससे उसकी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी …और पढ़ें अमेरिकी सरकार ने इमिग्रेशन प्रोग्राम सस्पेंड करने का फैसला किया। TCS बोली- हमें फर्क नहीं पड़ेगा TCS ने कहा, इससे उसकी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी पर असर नहीं पड़ेगा।
कंपनी अगले 5 सालों में 15,000 अमेरिकी लोगों को हायर करेगी। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी सरकार ने बड़ी आईटी कंपनियों को बड़ा झटका देते हुए इमिग्रेशन प्रोग्राम को सस्पेंड करने का फैसला किया है।
ट्रंप प्रशासन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि H-1B वीजा और विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के नियमों का गलत इस्तेल हो रहा है। इसका असर TCS कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, कैपजेमिनी और HCL जैसी कंपनियों पर पड़ेगा। ये कंपनियां ग्रीन कार्ड प्रोग्राम के तहत अब विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में नौकरी पर नहीं रख पाएंगी।
वीजा से जुड़े बड़े फैसलों की घोषणा के एक दिन बाद, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने शुक्रवार को कहा कि परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) से जुड़ा यह कदम उसकी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी या कस्टमर इंगेजमेंट पर असर नहीं डालेगा। वह अमेरिकी लोगों को ही हायर करने का प्लान बना रही है। वाशिंगटन में गुरुवार को एक ब्रीफिंग के दौरान वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने कहा, “धोखाधड़ी यह है कि इस प्रोग्राम के लिए अप्लाई करते समय वे जो बातें कह रहे हैं, वे बुनियादी तौर पर गलत हैं और इसलिए आखिरकार गैर-कानूनी हैं।” टीसीएस ने शुक्रवार को एक बयान जारी करके कहा कि US में हमारी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी लोकल टैलेंट को हायर करने पर आधारित है, जिसे एक मजबूत कैंपस रिक्रूटमेंट मॉडल का सपोर्ट मिलता है।
कंपनी ने कहा- “हमने देश भर में 31 ऑफिस और डिलीवरी सेंटर्स में एक बड़ी लोकल वर्कफोर्स तैयार की है। जैसा कि हमने पहले बताया था, हम अपनी लोकल वर्कफोर्स को और बढ़ाने के लिए अगले पाँच सालों में US में 15,000 और लोगों को हायर करने का प्लान बना रहे हैं।” कंपनी ने कहा कि पिछले दो सालों में हमारे PERM एप्लीकेशन की संख्या सिंगल डिजिट में रही है, इसलिए हमें उम्मीद नहीं है कि इस प्रोग्राम के सस्पेंशन से हमारी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी और कस्टमर इंगेजमेंट पर कोई असर पड़ेगा।
गुरुवार को लगभग एक साथ की गई घोषणा में, प्रशासन ने यह भी कहा कि उसने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और MIT समेत नौ बड़े कॉलेजों में विदेशी एक्सचेंज वीजा होल्डर्स की जांच शुरू कर दी है। अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल ने कहा कि ये जांच J-1 वीजा होल्डर्स पर केंद्रित होगी।
यूनिवर्सिटी में ये अक्सर विदेशी PhD कैंडिडेट या विजिटिंग स्कॉलर होते हैं।
