पटना: राजद नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को दावा किया कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रकाशित ‘‘मसौदा मतदाता सूची’’ में उनका नाम नहीं है। हालांकि, उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने इस दावे का खंडन करते हुए मसौदा मतदाता सूची का एक स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें यादव का विवरण और तस्वीर देखी जा सकती है।

प्रेस वार्ता के दौरान, पूर्व उपमुख्यमंत्री यादव ने अपने फोन को एक बड़ी स्क्रीन से जोड़ा और अपना ईपीआईसी नंबर खोजने की कोशिश की, जिससे परिणाम आया कि ‘‘कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।’’ तेजस्वी यादव ने कहा, ‘‘देखिए! मैं खुद मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हूं। इससे मैं चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता हूं। शायद, मुझे नागरिक नहीं माना जाएगा और मैं इस घर में रहने के अधिकार से भी वंचित हो जाऊंगा।’’

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता यादव ने यह भी दावा किया कि जब बूथ स्तर का अधिकारी उनके यहां गणना प्रपत्र लेकर आया था, तो उसने उन्हें कोई रसीद नहीं दी। राजद नेता ने कहा, ‘‘लेकिन, मैंने कोई कसर नहीं छोड़ते हुए अपना हस्ताक्षरित और विधिवत भरा हुआ फॉर्म सौंपते हुए अपनी तस्वीर खींच ली थी।’’ कुछ पत्रकारों ने यादव को सुझाव दिया कि वह शनिवार को निर्वाचन आयोग द्वारा सभी राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराए गए मतदाता सूची के मसौदे का ंिप्रटआउट देखें, हो सकता है उनका नाम उसमें हो।

यादव ने जवाब दिया, ‘‘आॅनलाइन तरीका ही ज्यादा लोगों के लिए उपलब्ध है। क्या आप उम्मीद करेंगे कि बिहार से बाहर रहने वाला कोई व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम देखने आएगा? मेरा कहना यह है कि जब हम जैसे लोग ही परेशानी का सामना कर रहे हैं, तो आम लोगों की तो बात ही क्या करें। मुझे सुनने में आया है कि एक आईएएस अधिकारी दंपति का नाम भी मतदाता सूची से गायब है।’’

राजद नेता ने हाल ही में आगामी विधानसभा चुनाव का ‘‘बहिष्कार’’ करने की धमकी देकर खलबली मचा दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि निर्वाचन आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण के जरिए सत्तारूढ़ राजग की ‘‘मदद’’ करने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी कहा, ‘‘मैं देखना चाहता हूं कि क्या किसी भाजपा नेता का नाम भी मसौदा मतदाता सूची से गायब है।’’ इस बीच, चौधरी ने तेजस्वी के दावे का खंडने करते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आपका नाम आपके पिता, आदरणीय लालू प्रसाद (राजद प्रमुख) के नाम के बिल्कुल साथ है। बेहतर होगा कि आप झूठे दावों की अपनी दुकान बंद कर दें।’’

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संपादक : नीरज दीवान

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