राष्ट्रवाणी: 25 साल पहले आई यह फिल्म मात्र डेढ़ करोड़ रुपये के बजट में बनी थी और इसने 4 नेशनल अवॉर्ड जीते थे। 25 साल पुरानी फिल्म ने जीते थे 4 नेशनल अवॉर्ड डेथ करोड़ रुपये के बजट में बनी थी फिल्म फिल्म में नहीं था एक भी फुल लेंथ गाना दीपेश पांडेय, मुंबई। कुछ वास्तविक लोगों और घटनाओं से प्रेरित होकर फिल्मकार मधुर भंडारकर ने साल 2001 में फिल्म चांदनी बार बनाई थी।
तब्बू और अतुल कुलकर्णी अभिनीत इस फिल्म की कहानी बार में काम करने वाली लड़की मुमताज और गैंगस्टर पोत्या सावंत की कहानी पर केंद्रित थी। सिर्फ डेढ़ करोड़ रुपये के छोटे बजट में बनी यह फिल्म टिकट खिड़की पर सुपरहिट रही। इसके साथ इसने अन्य सामाजिक विषयों पर आधारित बेस्ट फिल्म, बेस्ट अभिनेत्री, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर तथा बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस समेत चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीते।
28 सितंबर को 25 साल पूरे कर रही इस फिल्म के निर्माण के बारे में मधुर बताते हैं, ‘चांदनी बार (Chandni Bar) वो फिल्म थी, जिससे बतौर फिल्मकार मधुर भंडारकर (Madhur Bhandarkar) का जन्म हुआ। इससे मेरी जिंदगी में बहुत बड़ा बदलाव आया। फिल्म का ज्यादा बजट नहीं था, सिर्फ डेढ़ करोड़ रुपये के बजट में बनी थी।
हमारे पास तो उस समय मॉनीटर भी नहीं था, हमने पूरी फिल्म बिना मॉनीटर के शूट की थी’। फिल्म का टाइटल अलग किस्म का था, गाने भी नहीं थे। यह ऐसी फिल्म थी, जिसको लेकर पहले लोगों को आशंका थी कि पता नहीं इसका बिजनेस क्या होगा?
कैसे चलेगी? बस अंदर एक पागलपन और जुनून था कि किसी भी तरह से यह फिल्म बनानी है। फिल्म की करीब 70-75 प्रतिशत पटकथा वास्तविक घटनाओं से प्रेरित थी।
तब्बू का शांत चेहरा देखकर मुझे लगा कि नायिका मुमताज की 17 से 40 वर्ष की आयु तक की कहानी में वो एकदम सही फिट होंगी। तब्बू को कास्ट करने के बारे में मधुर ने बताया, ‘फिल्म ‘माचिस’ में उनकी परफार्मेंस देखकर मैं बहुत प्रभावित हुआ था। मुझे लगा कि वो यह भूमिका बहुत अच्छी तरह से निभाएंगी और उन्होंने निभाया भी।
इस भूमिका में मैं उनके अलावा और किसी के बारे में सोच भी नहीं सकता था। जब मैंने उन्हें स्क्रिप्ट सुनाई तो उन्हें बहुत पसंद आई। उन्होंने बतौर फिल्मकार मुझ पर विश्वास किया और तुरंत फिल्म करने के लिए हामी भर दी।
हालांकि, उस समय वो काफी कमर्शियल फिल्में करती थी, लेकिन इस फिल्म में उन्हें कुछ अलग दिखा और उन्होंने की। लीड हीरो को कास्ट करने के बारे में उन्होंने बताया, ‘उस समय मुझे बहुत से लोगों ने कहा कि पोत्या सावंत की भूमिका में किसी कमर्शियल हीरो को लो। ये तो डॉन का इतना अच्छा रोल है, कोई भी अभिनेता कर लेगा।
मुझे याद है कि जब मैंने अतुल कुलकर्णी को यह रोल सुनाया तो उन्होंने कहा कि क्या मैं यह भूमिका निभा पाऊंगा? क्योंकि मुझे तो लगा कि पोत्या सावंत कोई हट्टा-खट्टा बाडी बिल्डर लड़का होना चाहिए। जबकि अतुल उस समय बहुत पतले थे’।
इतनों लोगों से मिलने के बाद ही ऐसी कहानी बनती है। केंद्रीय भूमिकाओं के अलावा मैंने नारायणी शास्त्री, अनन्या खरे और मनोज जोशी जैसे थिएटर से जुड़े कलाकारों को कास्ट किया था। डांसिंग सीन के लिए कुछ वास्तविक बार बालाओं का कास्ट किया गया था।
छोटे बजट की फिल्म होने के कारण रिलीज होने के बाद पहले स्क्रीन पाने में थोड़ा संघर्ष तो करना पड़ा। हालांकि, जब लोगों ने पहले दूसरे दिन फिल्म देखा तो इसकी मांग यूं बढ़ी की हर जुबान पर चांदनी बार का नाम था। ये फिल्म साल 2001 में आई थी, उसी साल लगान, गदर, कभी खुशी कभी गम और दिल चाहता है जैसी फिल्में रिलीज हुई थी।
इसके बावजूद चांदनी बार उस साल के हर बड़े फिल्म अवार्ड्स में नामित हुई थी। इस फिल्म के लिए मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। मुझे याद है कि विज्ञान भवन में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों जब मुझे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला तो मुझे उस पल पर भरोसा ही नहीं हो रहा था।
मंच पर जाने से पहले मैंने खुद को चुटकी काटी थी कि ये हकीकत है या मैं कोई सपना देख रहा हूं। मुझे खुशी है कि लोग 25 साल बाद आज भी इसे एक कल्ट क्लासिक फिल्म के तौर पर याद करते हैं और देखते हैं। ये सिर्फ मेरी नहीं फिल्म से जुड़े हर व्यक्ति की मेहनत और भरोसे का परिणाम है।’ चांदनी बार (Chnadni Bar) 2001 में रिलीज हुई फिल्म को मधुर भंडारकर ने डायरेक्ट किया था।
यह फिल्म मुंबई अंडरवर्ल्ड की कठोर जिंदगी को दिखाती है, जिसमें वेश्यावृत्ति, डांस बार और बंदूक से जुड़े अपराध शामिल हैं। फिल्म में तब्बू और अतुल कुलकर्णी मुख्य भूमिकाओं में हैं और इसमें अनन्या खरे, राजपाल यादव, मीनाक्षी साहनी और विशाल ठक्कर ने अहम किरदार निभाए थे। फिल्म को क्रिटिक्स से बहुत तारीफ मिली और यह बॉक्स ऑफिस (Box Office) पर हिट रही।

