राष्ट्रवाणी: वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के शीर्ष 10% अमीर लोगों की आय विकसित देशों के सबसे गरीब 10% …और पढ़ें भारत के टॉप 10% रईसों से ज्यादा कमाते हैं अमीर देशों के सबसे गरीब लोग भारत के शीर्ष अमीर विकसित देशों के गरीबों से कम आय वाले। भारत में ₹800-900 प्रतिदिन कमाने वाला व्यक्ति अमीर श्रेणी में।
देश में आम लोगों की आय और उत्पादकता बढ़ाना आवश्यक। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: भारत में रोजाना 800-900 रुपये कमाने वाला व्यक्ति भी अमीरों की श्रेणी में आ सकता है, लेकिन अमेरिका-कनाडा जैसे देशों में इतनी कमाई गरीबों की श्रेणी में रख सकती है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़े भारत और अमीर देशों के लोगों के जीवन स्तर के बीच बड़ा अंतर दिखाते हैं।
भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन देश में लोगों की कमाई और जीवन स्तर को लेकर एक बड़ी चुनौती सामने आई है। वर्ल्ड बैंक के 2026 के Poverty and Inequality Platform के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के कुछ अमीर देशों में सबसे कम कमाने वाले 10% लोगों का आय या खपत का स्तर भी भारत के सबसे ज्यादा कमाने वाले 10% लोगों से अधिक है।
इससे पता चलता है कि भारत की चुनौती सिर्फ गरीबी कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में आम लोगों की कमाई और उत्पादकता बढ़ाना भी जरूरी है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के सबसे कम कमाने वाले 10% लोगों के लिए रोजाना प्रति व्यक्ति आय या खपत का स्तर करीब 3 डॉलर है। वहीं, अमेरिका में सबसे निचले 10% लोगों के लिए यह आंकड़ा 25 डॉलर, कनाडा में 31 डॉलर जबकि जर्मनी ओर ऑस्ट्रेलिया में 28 डॉलर है।
दूसरी ओर, भारत के सबसे ज्यादा कमाने वाले 10% लोगों के लिए रोजाना प्रति व्यक्ति आय या खपत का स्तर करीब 10 डॉलर है। अमेरिका में सबसे अमीर 10% लोगों के लिए यह आंकड़ा 173 डॉलर, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में 129 डॉलर और जर्मनी में 128 डॉलर है। इन आंकड़ों से साफ है कि भारत के सबसे अमीर तबके का जीवन स्तर भी कई विकसित देशों के सबसे निचले आय वर्ग से काफी पीछे है।
रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की एक और अहम बात सामने आती है। भारत के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, देश में 80,000 रुपये महीने कमाने वाला व्यक्ति भी कमाई के आधार पर शीर्ष 10% लोगों में शामिल हो सकता है। वहीं, अमेरिका, कनाडा और जापान जैसे देशों में रोजाना 10 डॉलर की खपत किसी व्यक्ति को सबसे निचले 10% आय वर्ग में पहुंचा सकती है।
यानी जिस आय स्तर पर भारत में कोई व्यक्ति अमीरों की श्रेणी में आ सकता है, वही कमाई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम कमाने वाले लोगों के स्तर के आसपास हो सकती है। फाउंडेशन फॉर इकोनॉमिक डेवलपमेंट की प्रोग्राम एसोसिएट अहोना दत्तगुप्ता ने कहा कि इन आंकड़ों से भारत की एक बड़ी आर्थिक चुनौती सामने आती है।
समस्या केवल गरीबी नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था में कम आय का स्तर है। उनके मुताबिक, गरीब भारतीयों का जीवन स्तर सुधारना जरूरी है, लेकिन केवल इतना करने से देश समृद्ध नहीं बन जाएगा। अगर गरीब लोगों की कमाई आज के बेहतर स्थिति वाले भारतीय परिवारों के बराबर भी हो जाए, तब भी उनका जीवन स्तर कई अमीर देशों के मुकाबले काफी नीचे रह सकता है।
उत्पादकता का मतलब है कि जमीन, श्रम और पूंजी जैसे संसाधनों का इस्तेमाल करके पहले से ज्यादा उत्पादन करना। जब उत्पादकता बढ़ती है, तो कंपनियों के कारोबार में विस्तार, बेहतर वेतन वाली नौकरियों और परिवारों की आय बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत होती हैं। अहोना दत्तगुप्ता के मुताबिक, उत्पादकता बढ़ाने के लिए नए विचारों और कारोबार में प्रयोग करने की आजादी जरूरी है।
उद्यमियों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए, जहां वे नए बिजनेस मॉडल आजमा सकें, असफल होने पर दोबारा कोशिश कर सकें और सफल होने पर अपने कारोबार को बड़ा बना सकें। इसके लिए कारोबार शुरू करना और बढ़ाना आसान बनाने, टैक्स व्यवस्था को उचित और स्थिर रखने तथा अनावश्यक नियमों और कागजी प्रक्रियाओं का बोझ घटाने की जरूरत है।
