राष्ट्रवाणी: जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी के अधिकार खत्म करने और पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने …और पढ़ें जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी का अधिकार खत्म करने पर चर्चा। जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और आसान बनाया जाएगा। छोटे कारोबारियों के लिए अनुपालन के नियम आसान होंगे।
एजेंसी, नई दिल्ली।57th जीएसटी Council Meeting: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली और राज्यों के मंत्रियों को शामिल करने वाली जीएसटी परिषद ने बृहस्पतिवार को जीएसटी 2.0 के तहत जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी के अधिकार को खत्म करने और आसान पंजीकरण जैसे व्यापक नीतिगत सुधारों पर चर्चा शुरू की।
इनका उद्देश्य भरोसे पर आधारित कर व्यवस्था के जरिये कारोबार करना आसान बनाना है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में पूरी तरह बदलाव को परिषद की मंजूरी मिलने के एक साल से कुछ अधिक समय बाद परिषद की 57वीं बैठक में कानून के नौ अपराधों को गैर-आपराधिक बनाकर उनमें आपराधिक दायित्व खत्म करने, 24 अपराधों के प्रावधानों को नरम करने और आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा पांच करोड़ रुपये तक बढ़ाने पर चर्चा होगी।
परिषद राज्यों में जीएसटी अधिकारियों द्वारा कर मांग उठाने के लिए अपनाई जाने वाली एक समान व्यवस्था पर भी चर्चा करेगी। इसके तहत औपचारिक नोटिस भेजने से पहले करदाता को अनिवार्य रूप से सूचना देनी होगी, ताकि उसे अपना पक्ष रखने का अवसर मिल सके। इसके अलावा, अगर मंजूरी मिलती है तो 10,000 रुपये से कम की कर मांग होने पर कोई जीएसटी नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।
ऐसे मामले फिलहाल संख्या के लिहाज से कुल मामलों के करीब 20 प्रतिशत हैं और इनमें कर की राशि नगण्य होती है। फर्जी ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ और प्राप्त किए गए कर क्रेडिट में असंगति से जुड़े नोटिसों से निपटने के लिए परिषद जीएसटी के मासिक रिटर्न में ‘इनवॉइस’ मिलान प्रणाली पर भी चर्चा करेगी। इसमें खरीदार और आपूर्तिकर्ता के चालानों का मिलान किया जाएगा और कर क्रेडिट का वैध रूप से दावा किया जा सकेगा।
ई-कॉमर्स मंचों पर सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान बनाने के वास्ते परिषद उन्हें उन राज्यों में मंच के गोदाम को कारोबार के पंजीकृत स्थान के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने पर विचार कर सकती है, जहां उनका अपना कोई परिसर नहीं है। छोटे आपूर्तिकर्ता को केवल एक राज्य में कारोबार का स्थान रखना होगा, जहां उसका भौतिक सत्यापन और आधार प्रमाणीकरण किया जाएगा।
अन्य राज्यों में पंजीकरण मंच की सहमति के अनुसार होगा और इसमें कर अधिकारी की कोई भूमिका नहीं होगी। इससे करीब 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को राज्यों में कार्यालय खोले बिना राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सकेगी और प्रतिस्पर्धी मंचों के अलग-अलग कारोबारी मॉडल के बीच कर समानता स्थापित होगी। जीएसटी कानून में प्रस्तावित बदलाव अगले साल की शुरुआत से चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे।
जीएसटी परिषद साल में केवल एक बार कर दरों में बदलाव करने और उन्हें अगले वित्त वर्ष की शुरुआत से लागू करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा कर सकती है। इससे कारोबारियों को स्थिरता मिलेगी। जीएसटी परिषद बृहस्पतिवार को जिन प्रमुख बदलावों पर चर्चा करेगी, उनमें जीएसटी कानून में संशोधन कर जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी का अधिकार खत्म करना और अभियोजन शुरू करने की सीमा पांच करोड़ रुपये करना शामिल है।
रिटर्न दाखिल करने में देरी, वर्गीकरण संबंधी विवाद और नकदी की स्थिति के कारण कर भुगतान में देरी जैसे मामलों में करदाता कर, ब्याज एवं आनुपातिक जुर्माना भरकर गिरफ्तारी से बच सकेगा। जीएसटी अधिकारी कर की वसूली पर ध्यान देंगे, जबकि कानूनी कार्रवाई के मामलों को कानून लागू करने वाली एजेंसियां देखेंगी।
फिलहाल जीएसटी अधिकारियों को उन बड़े अपराधों के मामलों में गिरफ्तारी करने का अधिकार है, जिनमें कर चोरी, धोखाधड़ी से ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (आईटीसी) लेना या गलत तरीके से ‘रिफंड’ (कर वापसी) लेना एक करोड़ रुपये से अधिक हो। इसके लिए आयुक्त स्तर के अधिकारी से पहले अनुमति लेना जरूरी है। परिषद खुफिया जानकारी के आधार पर माल ढुलाई और रास्ते में जांच की व्यवस्था पर भी चर्चा करेगी।
इसके तहत रास्ते में चल रहे वाहनों को केवल किसी वरिष्ठ अधिकारी की विशेष पूर्व अनुमति के आधार पर और केवल मूल राज्य द्वारा रोका जाएगा। हालांकि, दस्तावेज नहीं होने या खरीदार पर कर देय होने की स्थिति में यह अपवाद लागू होगा। इससे कई राज्यों में सड़क पर वाहनों को रोकने की व्यवस्था खत्म होगी, रास्ते में लगने वाला समय और माल ढुलाई की लागत काफी कम होगी तथा घरेलू और निर्यात सामान की आवाजाही अधिक अनुमानित हो सकेगी।
वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यातकों के लिए ‘रिफंड’ और कर क्रेडिट का दावा आसान बनाने के लिए परिषद निर्यात की परिभाषा को विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाली वाणिज्यिक गतिविधियों के अनुरूप करने के प्रस्ताव पर भी विचार करेगी। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर मिल रही है कि भारतीय कंपनी की विदेश स्थित शाखा के जरिये दी जाने वाली सेवाओं को निर्यात माना जाए या नहीं, इस बारे में अस्पष्टता भी दूर की जाएगी।
इसके अलावा, परिषद निर्दिष्ट बैंकों और नामित एजेंसियों द्वारा सोना, चांदी तथा प्लैटिनम के आयात पर मिलने वाली आईजीएसटी छूट वापस लेने पर भी विचार करेगी। फिलहाल सोना, चांदी एवं प्लैटिनम के आयात पर तीन प्रतिशत आईजीएसटी लगता है। हालांकि, जब इन कीमती धातुओं का आयात बैंकों और सरकार द्वारा समय-समय पर सूचीबद्ध नामित एजेंसियों द्वारा किया जाता है तो इस कर से छूट मिलती है।
कर्मचारियों को दिए जाने वाले बीमा कवर के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर नियोक्ताओं को ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (आईटीसी) का दावा करने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर भी परिषद चर्चा करेगी। वस्तु एवं सेवा कर कानून के तहत अपने या अपने परिवार के लिए जीवन या स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने वाले व्यक्तियों को जीएसटी से छूट है।
हालांकि, जब कोई कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए जीवन या स्वास्थ्य बीमा कवर खरीदती है, तो उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है और अब तक कारोबार इस पर आईटीसी का दावा नहीं कर सकता था। जीएसटी लागू होने के नौ साल पूरे होने के बाद परिषद अपने कर अधिकारियों की समितियों के पुनर्गठन पर भी विचार कर सकती है।
अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एक जुलाई, 2017 को लागू हुई थी। परिषद के समग्र कामकाज में सहायता करने वाली समिति की मौजूदा संरचना को तीन समेकित निकायों- सचिवालय, कार्यान्वयन समिति और अधिकारियों की एकल स्थायी समिति में पुनर्गठित करने का प्रस्ताव है। फिलहाल जीएसटी कर अधिकारियों की समिति में सचिवालय, एक कार्यान्वयन समिति, ‘फिटमेंट’ और कानून समितियों समेत आठ स्थायी समितियां तथा 18 क्षेत्रवार समूह हैं।
