होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: ईरान-तेल तनाव के बीच, अमेरिका की तेल कंपनियों ने ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी व्यवधान से वैश्विक ईंधन संकट और भी गहरा हो सकता है। यह मार्ग दुनियाभर के तेल और रिफाइंड उत्पादों की आपूर्ति का अहम हिस्सा है, और इसकी बाधा से बाजार में भारी अस्थिरता आ सकती है।

तेल कंपनियों की चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, एक्सॉन मोबिल, शेवरॉन और कोनोकोफिलिप्स जैसे बड़े तेल उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि अगर इस समुद्री मार्ग में रुकावट जारी रही, तो तेल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सट्टेबाज यदि कीमतों को और ऊपर धकेलते हैं, तो रिफाइंड उत्पादों की कमी भी हो सकती है।

अमेरिका की स्थिति
अमेरिका में तेल उत्पादन सीमित है, और होर्मुज के बंद होने से करीब 90 लाख से 1 करोड़ बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। बुधवार को तेल की कीमतें 87 डॉलर से बढ़कर शुक्रवार तक 99 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई हैं।

ट्रंप का प्रयास
राष्ट्रपति ट्रंप ने सात देशों से युद्धपोत तैनात कर जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। उनका उद्देश्य है कि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे, क्योंकि चीन जैसे देशों को करीब 90% तेल इसी रास्ते से मिलता है।

होर्मुज का महत्व
यह संकरा जलमार्ग, जो ईरान और ओमान के बीच है, विश्व की ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य आधार है। रोजाना दो करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिससे वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और घरेलू कीमतें प्रभावित होती हैं।

अगर होर्मुज में संकट जारी रहा, तो विश्व के तेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसलिए इस इलाके में तनाव कम करने और आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में अंतरराष्ट्रीय प्रयास जरूरी हैं।



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