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अमेरिका-ईरान तनाव से क्रिप्टो बाजार में घबराहट- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर क्रिप्टो बाजार पर साफ दिखा। बिटकॉइन 63,000 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद दोनों देशों के बीच हालात और गंभीर होने की आशंका बढ़ी, जिससे निवेशकों में डर पैदा हुआ। खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज जैसे समुद्री मार्ग पर तनाव ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई, जो वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, निवेशकों ने बदली रणनीति-पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित विकल्प जैसे सोना, सरकारी बॉन्ड और डॉलर की ओर रुख करते हैं। वहीं बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी से पैसा निकलने लगा। इसी वजह से बिटकॉइन में तेज बिकवाली हुई और इसकी कीमत महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गई।

‘डिजिटल गोल्ड’ की छवि पर सवाल-बिटकॉइन को लंबे समय से ‘डिजिटल गोल्ड’ माना जाता रहा है, जो आर्थिक संकट में सुरक्षित निवेश साबित हो सकता है। लेकिन मौजूदा तनाव के बीच बिटकॉइन की गिरावट ने यह धारणा कमजोर कर दी है। निवेशक इसे अभी भी जोखिम भरा एसेट समझते हैं और अनिश्चितता के समय इससे दूर रहना बेहतर मानते हैं।

64,000 डॉलर के ऊपर टिक नहीं पाया बिटकॉइन-हाल के दिनों में बिटकॉइन ने 64,000 डॉलर के ऊपर वापसी की कोशिश की, लेकिन ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया। अमेरिका-ईरान तनाव के बढ़ने से बाजार का माहौल बदल गया और बिटकॉइन दबाव में आ गया। इसके अलावा ऊंची ब्याज दरें, संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और कमजोर निवेश माहौल ने भी क्रिप्टो बाजार को प्रभावित किया।

रिकॉर्ड स्तर से करीब आधा नीचे बिटकॉइन-अक्टूबर 2025 में बिटकॉइन ने 1.26 लाख डॉलर के रिकॉर्ड स्तर को छुआ था, लेकिन अब इसकी कीमत लगभग 50% गिर चुकी है। इससे निवेशकों का भरोसा काफी हद तक कमजोर हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे बिटकॉइन की दिशा अमेरिका-ईरान विवाद, तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर निर्भर करेगी। तनाव कम हुआ तो सुधार संभव है, नहीं तो दबाव बढ़ सकता है।

 

 

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