ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के स्टार सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने एक बेहद तीखा और सनसनीखेज बयान देकर वर्ल्ड क्रिकेट में नस्लवाद और धार्मिक भेदभाव की बहस को दोबारा जिंदा कर दिया है। एक विशेष इंटरव्यू में ख्वाजा ने खुलकर अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “एक मुस्लिम क्रिकेटर होने के नाते, कई बार मुझे ऐसा महसूस कराया गया कि मैं ऑस्ट्रेलिया की टीम या उस समाज का हिस्सा ही नहीं हूँ। मुझे एक अलग नजरिए से देखा गया।” ख्वाजा का यह बयान क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) के उन दावों की धज्जियां उड़ाता है जिसमें वे ‘समानता और विविधता’ की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं।

ख्वाजा ने आगे कहा कि वह एक ऐसा ऑस्ट्रेलिया देखना चाहते हैं जहां खिलाड़ी का मजहब या उसका रंग नहीं, बल्कि सिर्फ उसका खेल मायने रखे। इस बयान के बाद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट गलियारों में हड़कंप मच गया है। कई पूर्व खिलाड़ियों ने ख्वाजा के इस स्टैंड का समर्थन किया है, तो वहीं कुछ लोग इसे टीम के माहौल को खराब करने वाला बयान बता रहे हैं। ड्रेसिंग रूम के भीतर छिपे इस कड़वे सच ने यह साबित कर दिया है कि जेंटलमेंस गेम कहे जाने वाले इस खेल में आज भी नस्लीय और धार्मिक दूरियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।



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