वायनाड: वायनाड के मुंडक्कई-चूरलमाला क्षेत्र में पिछले 24 घंटे से हो रही भारी बारिश के कारण फिर से बाढ़ और भूस्खलन की आशंका पैदा हो गई है, जबकि ठीक एक साल पहले यहां भीषण भूस्खलन में 200 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

जिला अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि चूरलमाला नदी उफान पर है और कीचड़ युक्त पानी तेजी से बह रहा है तथा बेली ब्रिज के पास नदी के तटीय क्षेत्रों में कटाव हो रहा है। नदी के दोनों किनारों पर मरम्मत कार्य के लिए जमा की गई मिट्टी बह गई है, जिससे अट्टामाला रोड और आस-पास के इलाकों में पानी भर गया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें लगता है कि पर्वतीय क्षेत्रों में खास तौर पर पुंचिरीमट्टम के पास के जंगली इलाकों में हालिया भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि अब तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने कहा, ‘‘जंगल के अंदर पुंचिरीमट्टम के पर्वतीय क्षेत्र में भूस्खलन की नयी घटना की कोई पुष्टि नहीं हुई है।’’ डीडीएमए ने कहा, ‘‘पूर्व की भूस्खलन की घटनाओं के बाद निकला मलबा बारिश के साथ नीचे आ रहा है। यह संभवत? कटाव वाला सारा मलबा बहने तक यह कुछ समय तक जारी रहेगा।’’

जुलाई 2024 की आपदा को याद करते हुए निवासी ंिचतित हैं, जिसमें मकान ढह गए थे, कई लोग घायल हो गए थे और सैकड़ों लोग बेघर हो गए थे। जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में व्यापक बारिश के कारण बाढ़ आई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि तत्काल कोई खतरा नहीं है और वे स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

नीचे की ओर मनंतावडी और पनामारम में कबानी नदी में जल स्तर बढ़ गया है। बाणासुर बांध लगभग पूरा भर गया है और आस-पास के क्षेत्रों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने वायनाड सहित 11 जिलों के लिए ‘आॅरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिसमें अगले तीन घंटों में मध्यम बारिश और 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और अलप्पुझा में भी हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

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