नयी दिल्ली. महिला पहलवान अंतिम पंघाल ने रविवार को विश्व चैंपियनशिप के ट्रायल्स में 53 किग्रा भार वर्ग में बिना किसी परेशानी के भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली जबकि वैष्णवी पाटिल (65 किग्रा) और मनीषा भानवाला (62 किग्रा) ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन के साथ क्वालीफाई किया. अंतिम 20 साल की उम्र में सीनियर विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेलों और एशियाई चैंपियनशिप में पदक जीत चुकी हैं. उन्होंने मध्य प्रदेश की पूजा और गुजरात की हिनाबेन को बिना एक भी अंक गंवाए हराया और विजेता बनीं.

अंतिम ने 2022 में देश की पहली अंडर-20 विश्व चैंपियन बनकर सुर्खियां बटोरी थीं और 2024 पेरिस ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई किया था. लेकिन वह ओलंपिक में विवादों में घिर गई थीं. पेरिस में मैट में उनका प्रदर्शन फीका रहा और उन्होंने अपनी बहन को अपने मान्यता कार्ड पर खेल गांव भेजकर बड़ा विवाद भी खड़ा कर दिया था. भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किया लेकिन ऐसा नहीं किया.

हाल में वह अपने निजी कोच के साथ विदेश में ट्रेनिंग लेना चाहती थीं, लेकिन डब्ल्यूएफआई ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और उन्हें राष्ट्रीय शिविर में प्रशिक्षण लेने के लिए कहा. पेरिस ओलंपिक के बाद के मुश्किल समय के बारे में पूछने पर अंतिम ने गलती करने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि ऐसा जानकारी के अभाव में हुआ था.

उन्होंने कहा, ”महासंघ को मुझसे कोई समस्या नहीं थी. भ्रम की स्थिति थी, मैंने भी गलती की. मुझे अहसास नहीं हुआ. ओलंपिक खेल एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप से अलग है. मुझे ज्यादा जानकारी नहीं थी. ” अंतिम ने कहा, ”एशियाई खेलों में भी खेल गांव था लेकिन हांग्झोउ में एक होटल में रुके थे. इसलिए भ्रम की स्थिति थी, मैंने ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा था. दबाव था और इसका असर मैच में भी हुआ. ” उन्होंने कहा, ”फिर मुझे शिविर में आने के लिए कहा गया. महासंघ ने मेरी मदद की. मुझे दो टूर्नामेंट में भेजा गया जहां मैंने स्वर्ण पदक जीता. ”

अंतिम ने कहा, ”मैं कभी भी चीजों को हल्के में नहीं लेती. मुकाबले किसी भी तरफ जा सकते हैं. ” अंतिम ने रविवार को आईजी स्टेडियम में हुए ट्रायल्स के दौरान अपनी रणनीति के साथ आक्रामक रुख अपनाया. पूजा के खिलाफ उनकी रणनीति कारगर रही. अंतिम ने पहले ही मौके पर ‘फितले’ का इस्तेमाल करके पूजा को तीन बार पटक दिया और 6-0 की बढ़त बना ली. इससे उनकी प्रतिद्वंद्वी के घुटने में चोट लग गई जिसके बाद वह आगे नहीं खेल सकीं.

हिनाबेन ने जूली को कड़ी चुनौती दी लेकिन अंतिम के खिलाफ मुकाबला बहुत मुश्किल साबित हुआ. अंतिम तकनीकी और रणनीतिक रूप से अधिक मजबूत थी जिससे उन्होंने तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर मुकाबला जीत लिया. जगरेब में 13 से 21 सितंबर तक होने वाली विश्व चैंपियनशिप में भारतीय टीम युवा खिलाड़ियों की है जिसमें केवल कुछ ही 20 से अधिक उम्र पहलवान हैं.

प्रविष्टियां ज्यादा नहीं थीं जिससे ड्रॉ छोटे रहे. फिर भी 65 किग्रा वर्ग में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली जिसमें महाराष्ट्र की वैष्णवी पाटिल ने बाजी मारी. फ्रीडम यादव के खिलाफ उन्होंने 10-6 से जीत हासिल करने के बाद मुस्कान को 7-2 से हराया. वहीं 62 किग्रा वर्ग में केवल मनीषा और मानसी अहलावत ने प्रतिस्पर्धा की. मनीषा ने 2-0 से जीत हासिल की. ज्योति ने 72 किग्रा वर्ग में र्हिषता को 11-6 से हराया जबकि 76 किग्रा वर्ग में प्रिया मलिक ने अनुभवी किरण को 4-2 से हराया. अन्य विजेताओं में अंकुश (50 किग्रा), निशू (55 किग्रा), तपस्या (57 किग्रा), नेहा (59 किग्रा), और सृष्टि (68 किग्रा) शामिल रहीं.

कल्याण से हिसार और फिर विश्व चैंपियनशिप तक, ढाबा मालिक की बेटी वैष्णवी चयन ट्रायल में छाई
आगामी विश्व चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में वैष्णवी पाटिल अपनी गति और मैट पर दबदबे के साथ छाई रहीं. उन्होंने अगले महीने जगरेब में होने वाली विश्व चैंपियनशिप के लिए महिलाओं के 65 किग्रा वर्ग में राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए अपनी प्रतिद्वंद्वियों को एक-एक करके मात दी.

उनकी रणनीतिक कुशलता और मजबूत डिफेंस को देखते हुए यह विश्वास करना मुश्किल है कि उन्होंने केवल चार साल ही मैट कुश्ती में बिताए हैं. मुंबई के कल्याण में एक ढाबा मालिक की बेटी वैष्णवी ने हालांकि काफी देर से शुरुआत की लेकिन वह इससे दोगुनी तेजी से देश में शीर्ष स्तर पर पहुंच गई हैं.

वैष्णवी ने ट्रायल के फाइनल में मुस्कान को 7-2 से हराने के बाद कहा, ”मैंने 2020 के अंत में मैट कुश्ती शुरू की. उससे पहले मैं सिर्फ मिट्टी की कुश्ती ही करती थी. जब मैंने 2016 रियो में साक्षी मलिक को पदक जीतते देखा तो मैंने तय कर लिया कि मुझे क्या करना है, मैं बस इसी खेल को अपनाना चाहती हूं. ” उन्होंने कहा, ”मेरे पिता एक ढाबा चलाते हैं और मेरी मां गृहिणी हैं. मेरे माता-पिता मेरे लिए सब कुछ संभाल रहे हैं. महाराष्ट्र में ज्यादा अच्छी अकादमियां नहीं थीं तो मैं हिसार आ गई. ” बाईस साल की वैष्णवी सुशील कुमार अखाड़े में कोच जसबीर के अधीन प्रशिक्षण ले रही हैं.

वैष्णवी 2016 ओलंपिक चैंपियन, तोक्यो (2021) और पेरिस खेलों (2024) की कांस्य पदक विजेता और सात बार की विश्व पदक विजेता अमेरिकी पहलवान हेलेन मारौलिस को अपना आदर्श मानती हैं. उन्होंने कहा, ”वह एक बेहतरीन पहलवान है. मैं यूट्यूब पर उनके मुकाबले देखती हूं. मैं अपने और देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं. मुझे विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने का पूरा भरोसा है और अंतत? मैं ओलंपिक पदक जीतना चाहती हूं. ”

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