नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र और राज्यों से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें यह घोषित करने की अपील की गई है कि उपभोक्ताओं को वितरकों और विक्रेताओं के विवरण के अलावा उत्पादों के बारे में ‘जानने का अधिकार’ है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गयी याचिका में कहा गया है कि उपभोक्ताओं के लिए सुविचारित विकल्प चुनने तथा अनुचित या प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं और अनुचित शोषण से खुद को बचाने के लिए ‘जानने का अधिकार’ महत्वपूर्ण है।

याचिका में संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि प्रत्येक वितरक, व्यापारी और दुकानदार प्रवेश द्वार पर नाम, पता, फोन नंबर और कर्मचारियों की संख्या समेत पंजीकरण का विवरण मोटे अक्षरों में प्रर्दिशत करें ताकि लोगों को स्पष्ट नजर आये।

याचिका में कहा गया है, ‘‘जानने का अधिकार उपभोक्ताओं को धोखेबाज या भ्रामक वितरक, डीलर, व्यापारी, विक्रेता और दुकान मालिक का शिकार होने से बचाता है, जो उत्पाद/सेवा के बारे में गलत जानकारी दे सकते हैं या खरीद-बिक्री और धन के लेन-देन के बाद गायब हो सकते हैं।’’

उपाध्याय ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से यह याचिका दायर की है। उसमें कहा गया है कि यदि किसी उपभोक्ता को किसी उत्पाद या सेवा से कोई समस्या है, तो उसके लिए शिकायत दर्ज करने और उपभोक्ता निवारण मंचों के माध्यम से निवारण प्राप्त करने के लिए वितरक, डीलर और विक्रेता का विवरण जानना आवश्यक है।

याचिका में कहा गया है, ‘‘जब कोई वितरक, डीलर, व्यापारी, विक्रेता और दुकान मालिक अपने विवरण के बारे में पारदर्शी होते हैं, तो इससे एक निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी बाजार को बढ़ावा मिलता है जहां उपभोक्ता विचारित विकल्प चुन सकते हैं।’’

याचिकाकर्ता ने रेखांकित किया कि उपभोक्ता को न केवल माल या उत्पाद की गुणवत्ता, मात्रा, क्षमता, शुद्धता, मानक, विनिर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और बीआईएस या एफएसएसएआई प्रमाणीकरण के बारे में जानने का अधिकार है, बल्कि उसे वितरक, डीलर, व्यापारी, विक्रेता और दुकान मालिक का विवरण भी जानने का अधिकार है।

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