राष्ट्रवाणी: Kesub Mahindra Birthday: केशब महिंद्रा ने लगभग पांच दशकों तक महिंद्रा ग्रुप का नेतृत्व किया, जिसके दौरान कंपनी ने स्टील …और पढ़ें केशब महिंद्रा ने 48 साल तक महिंद्रा ग्रुप का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में महिंद्रा ग्रुप ने कारोबार का व्यापक विस्तार किया।

भारतीय उद्योग में उनके महत्वपूर्ण योगदान को सदैव याद किया जाएगा। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: देश के बड़े कारोबारी समूहों में शामिल महिंद्रा ग्रुप (Mahindra Group) को आज जिस पहचान से जाना जाता है, उसकी नींव मजबूत करने में केशब महिंद्रा (Kesub Mahindra) की अहम भूमिका रही है। 9 अक्टूबर 1923 को शिमला में जन्मे केशब महिंद्रा ने करीब पांच दशक तक कंपनी का नेतृत्व किया।

उनके नेतृत्व में महिंद्रा ग्रुप ने अपने शुरुआती कारोबार से आगे बढ़कर ऑटोमोबाइल, ट्रैक्टर और कई दूसरे क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत की। केशब महिंद्रा ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के व्हाटर्न स्कूल से पढ़ाई की थी। इसके बाद 1947 में वह महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) से जुड़े।

उस समय कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से स्टील के व्यापार और जीप की असेंबलिंग से जुड़ा था। साल 1963 में उन्होंने कंपनी के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद करीब 48 साल तक उन्होंने समूह का नेतृत्व किया।

केशब महिंद्रा के नेतृत्व में कंपनी ने अपने कारोबार का दायरा बढ़ाया। महिंद्रा की पहचान केवल जीप बनाने वाली कंपनी तक सीमित नहीं रही, बल्कि कृषि उपकरण और ट्रैक्टर कारोबार में भी उसकी मजबूत मौजूदगी बनी। आगे चलकर ग्रुप ने आईटी, रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाओं और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार किया।

वैश्विक कंपनियों के साथ कारोबारी साझेदारी बनाने में भी उनकी भूमिका रही। साल 2012 में केशब महिंद्रा चेयरमैन पद से रिटायर हुए। इसके बाद उनके भतीजे आनंद महिंद्रा ने यह जिम्मेदारी संभाली।

केशब महिंद्रा ने कंपनी को एक विविध कारोबार वाले समूह के रूप में विकसित करने में योगदान दिया। उनका नेतृत्व ऐसे समय में रहा, जब भारतीय उद्योग तेजी से बदल रहा था और कंपनियां नए बाजारों में अपनी जगह बना रही थीं। केशब महिंद्रा सिर्फ महिंद्रा ग्रुप तक सीमित नहीं रहे।

उन्होंने कई कंपनियों के बोर्ड में भी काम किया और हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HUDCO) के संस्थापक चेयरमैन रहे। वह 2004 से 2010 के बीच प्रधानमंत्री की व्यापार एवं उद्योग परिषद के सदस्य भी रहे। फ्रांस सरकार ने 1987 में उन्हें शेवेलियर डी ला लेजियन द ऑनर सम्मान से नवाजा था।

12 अप्रैल 2023 को 99 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनकी कारोबारी विरासत महिंद्रा ग्रुप के विकास और भारतीय उद्योग जगत में उनके योगदान के रूप में याद की जाती है।

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