राष्ट्रवाणी: जब मोबाइल की बैटरी 20% से नीचे आती है तो फोन धीमा हो जाता है, जिसका मुख्य कारण पावर मैनेजमेंट …और पढ़ें बैटरी 20% से नीचे जाते ही फोन क्यों हो जाता है स्लो? ज्यादातर लोग नहीं जानते इसकी वजह जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली।
अगर आपके मोबाइल फोन की बैटरी भी 20 परसेंट से नीचे आते ही मोबाइल थोड़ा स्लो महसूस होने लगता है, एप्स ओपन होने में जरूरत से ज्यादा टाइम लगता है या फोन की परफॉर्मेंस पहले जैसी नहीं रहती, तो जरूरी नहीं कि मोबाइल में कोई खराबी ही हो। कभी-कभी इसके पीछे फोन का पावर मैनेजमेंट सिस्टम भी होता है।
जी हां, स्मार्टफोन कंपनियां ऐसे में बैटरी को बचाने के लिए डिवाइस की परफॉर्मेंस को कम कर देती हैं। दरअसल स्मार्टफोन में प्रोसेसर, डिस्प्ले, नेटवर्क और बैकग्राउंड में रन कर रहे एप्स लगातार पावर यूज करते रहते हैं। ऐसे में जब बैटरी का लेवल से कम हो जाती है, तो फोन का सिस्टम बैटरी को ज्यादा देर तक चलाने के लिए पावर को कम करने कर देता है।
ऐसे में कुछ डिवाइस प्रोसेसर की स्पीड या बैकग्राउंड एक्टिविटी को लिमिटेड कर देते हैं। ऐसे में इसका असर एप्स की स्पीड, गेमिंग परफॉर्मेंस और मल्टीटास्किंग में साफ देखने को मिलता है। हालांकि, हर डिवाइस में 20 परसेंट बैटरी पर ऐसा हो जरूरी नहीं है।
ये मोबाइल के मॉडल, सॉफ्टवेयर और कंपनी की पावर मैनेजमेंट सेटिंग्स पर डिपेंड करता है। कुछ स्मार्टफोन्स में तो Battery Saver या Power Saving Mode अपने आप कम बैटरी पर एक्टिव हो जाता है। ये फीचर बैकग्राउंड में चल रही एक्टिविटी, सिंकिंग, विजुअल इफेक्ट्स और कुछ अन्य प्रोसेस को लिमिटेड कर देता है।
इसका मकसद फोन की बैटरी को ज्यादा टाइम तक चलाना होता है। कुछ केस में तो यूजर को लगता है कि फोन स्लो हो गया है, जबकि असलियत में पावर सेविंग फीचर एक्टिव होने की वजह से फोन की कुछ परफॉर्मेंस लिमिट की गई होती हैं। इतना ही नहीं अगर आपके मोबाइल की बैटरी ज्यादा पुरानी हो चुकी है और उसकी कैपेसिटी कम हो गई है, तो कम चार्ज पर परफॉर्मेंस में गिरावट ज्यादा लग सकती है।
बैटरी की कंडीशन खराब होने पर फोन को स्टेबल पावर भी नहीं मिलती। इसलिए अगर आपके डिवाइस की बैटरी बार बार 20 परसेंट से नीचे जाती है तो ये स्लो लग सकता है।
