राष्ट्रवाणी: Clean Wood Furniture Without Repolishing Guide: पुरानी लकड़ी की मेज अगर समय के साथ अपनी चमक खो चुकी है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसे दोबारा पॉलिश कराने की जरूरत है. कई बार धूल, गंदगी, उंगलियों के निशान, पानी के दाग और लंबे समय तक इस्तेमाल की वजह से लकड़ी की सतह फीकी नजर आने लगती है. धूप, नमी और गलत क्लीनर का इस्तेमाल भी इसकी चमक कम कर सकता है. ऐसे में कुछ आसान तरीकों से बिना दोबारा पॉलिश किए पुरानी लकड़ी की मेज को फिर से चमकाया जा सकता है. सबसे पहले मेज की अच्छी तरह सफाई करें लकड़ी की मेज को चमकाने का पहला कदम उसकी सतह को साफ करना है. इसके लिए मुलायम माइक्रोफाइबर कपड़े का इस्तेमाल करें. अगर मेज पर सिर्फ धूल जमी है, तो सूखे कपड़े से लकड़ी के दानों की दिशा में धीरे-धीरे पोंछें. अगर सतह पर चिकनाई, उंगलियों के निशान या चिपचिपी गंदगी जमा है, तो हल्के गर्म पानी में कुछ बूंदें माइल्ड डिश सोप की डालकर सफाई का घोल तैयार कर सकते हैं. इसमें माइक्रोफाइबर कपड़ा हल्का गीला करें और अच्छी तरह निचोड़ लें. कपड़ा बहुत ज्यादा गीला नहीं होना चाहिए. किसी भी घोल को पूरी मेज पर लगाने से पहले उसे किसी ऐसी जगह पर लगाकर देखें जो आसानी से दिखाई न देती हो. इससे पता चल जाएगा कि इससे लकड़ी की फिनिश या रंग पर कोई असर तो नहीं पड़ रहा. अब हल्के हाथों से मेज की सतह को साफ करें. सफाई के बाद लकड़ी को ज्यादा देर तक गीला न छोड़ें. एक साफ और सूखे कपड़े से लकड़ी के दानों की दिशा में इसे अच्छी तरह सुखा दें. अगर मेज पर लंबे समय से फर्नीचर वैक्स लगाया जाता रहा है, तो समय के साथ उसकी कई परतें जमा हो सकती हैं. इससे लकड़ी चमकदार होने के बजाय धुंधली दिखाई देने लगती है. ऐसी स्थिति में बाजार में मिलने वाले लकड़ी के क्लीनर या वैक्स रिमूवर का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे इस्तेमाल करते समय पैकेज पर दिए निर्देशों का पालन करें. सफाई के बाद सतह को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है. अगर मेज की सतह पर छोटी खरोंचें या हल्की असमानता है, तो बारीक ग्रिट वाले सैंडपेपर से बहुत हल्के हाथों से उसे ठीक किया जा सकता है. सैंडपेपर को लकड़ी के दानों की दिशा में इस्तेमाल करें. अगर खरोंच ज्यादा गहरी है, तो पहले थोड़े मोटे ग्रिट और उसके बाद बारीक ग्रिट वाले सैंडपेपर का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, ज्यादा रगड़ने से लकड़ी की ऊपरी फिनिश या रंग हट सकता है. सैंडिंग के बाद गीले कपड़े से धूल साफ करें. अगर इस प्रक्रिया में लकड़ी का रंग या ऊपरी कोट हट जाता है, तो उस हिस्से को दोबारा स्टेन करने की जरूरत पड़ सकती है. लकड़ी की मेज पर गीले गिलास, गमले या गर्म बर्तन रखने से पानी के गोल निशान या दाग बन सकते हैं. इन्हें हटाने के लिए पहले किसी कम दिखाई देने वाली जगह पर तरीका आजमाना बेहतर है. हल्के पानी के निशान के लिए हेयर ड्रायर की गर्म सेटिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है. ड्रायर को बहुत गर्म न रखें और उसे निशान के ऊपर लगातार आगे-पीछे चलाते रहें. धीरे-धीरे दाग हल्का हो सकता है. इसके बाद फर्नीचर ऑयल लगाया जा सकता है. एक और तरीका यह है कि निशान के ऊपर कपड़ा रखकर उसके ऊपर हल्का गर्म आयरन कुछ देर धीरे-धीरे चलाएं. इसके बाद फर्नीचर ऑयल लगाएं. मेज की खोई हुई चमक वापस लाने में फर्नीचर ऑयल या लकड़ी के लिए बने पॉलिश प्रोडक्ट मदद कर सकते हैं. ऐसा प्रोडक्ट चुनें जिसमें वैक्स न हो, क्योंकि समय के साथ वैक्स की परत जमा होकर लकड़ी को चमकदार बनाने के बजाय धुंधला कर सकती है. ऑयल को बहुत ज्यादा मात्रा में न लगाएं. इसकी पतली परत ही काफी है. ज्यादा ऑयल लगाने से सतह चिपचिपी हो सकती है और उस पर धूल, गंदगी या पालतू जानवरों के बाल आसानी से चिपक सकते हैं. ऑयल लगाने के बाद इसे करीब 15 मिनट तक लकड़ी में सोखने दें. इसके बाद मुलायम और साफ कपड़े से धीरे-धीरे बफ करें. इससे मेज की सतह ज्यादा साफ और चमकदार नजर आने लगेगी. अगर मेज की फिनिश काफी खराब हो चुकी है, गहरी खरोंचें हैं या लकड़ी को बड़े स्तर पर रिपेयर की जरूरत है, तो खुद से प्रयोग करने के बजाय फर्नीचर रेस्टोरेशन एक्सपर्ट की मदद लेना बेहतर है. एक बार मेज की फिनिश ठीक हो जाने के बाद उसकी देखभाल करना भी आसान हो जाता है. चमक बरकरार रखने के लिए इन बातों का रखें ध्यान मेज को नियमित रूप से मुलायम कपड़े से साफ करते रहें. गिलास, खाने की प्लेट और गर्म बर्तनों से पानी, दाग और गर्मी से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कोस्टर, प्लेसमैट और ट्रिवेट का इस्तेमाल करें. सजावटी सामान को सीधे लकड़ी पर घसीटने के बजाय उठाकर रखें, ताकि सतह पर खरोंच न आए. अगर कुछ महीनों बाद मेज फिर से थोड़ी फीकी नजर आने लगे, तो जरूरत के हिसाब से थोड़ी मात्रा में फर्नीचर ऑयल लगाया जा सकता है. लेकिन लकड़ी की मेज पर कभी भी तेज या खुरदरे क्लीनर का इस्तेमाल न करें. ऐसे प्रोडक्ट उसकी फिनिश को नुकसान पहुंचा सकते हैं और पुरानी मेज की चमक और भी कम कर सकते हैं. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. 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