नयी दिल्ली. ओलंपिक चैंपियन अभिनव बिंद्रा ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम में मौजूद कई सकारात्मक तत्वों की सराहना की है और कहा है कि यह भारतीय खेलों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हमें एक बहुत ही ठोस ढांचा प्रदान करता है. लोकसभा ने 11 अगस्त को राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 पारित किया. इसके एक दिन बाद राज्यसभा ने दो घंटे से अधिक चली चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया.

मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा मंजूरी देने के बाद यह विधेयक अधिनियम बन गया. यह विधेयक भारत के खेल प्रशासन में आमूलचूल परिवर्तन का वादा करता है और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इसे एक अभूतपूर्व सुधार बताया है. भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में बिंद्रा ने कहा, ”मुझे लगता है कि यह अधिनियम भारतीय खेलों के लिए एक नई शुरुआत का संकेत देता है. यह कोई रहस्य नहीं है कि पिछले कुछ दशकों में हमने प्रशासन के साथ थोड़ा संघर्ष किया है और मुझे लगता है कि यह अधिनियम अब हमें भारतीय खेलों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक बहुत ही ठोस ढांचा प्रदान करता है.”

उन्होंने आगे कहा, ”मुझे लगता है कि इस अधिनियम में कई सकारात्मक तत्व हैं जिनमें खेल पंचाट भी शामिल है. भारतीय खेलों में काफी मुकदमेबाजी होती है और मुझे लगता है कि इस पंचाट का गठन एक बहुत ही सकारात्मक बात है क्योंकि यह खेल संबंधी मामलों और विवादों पर विशेष ध्यान देगा और उन्हें शीघ्रता से तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचाएगा.” बीजिंग ओलंपिक 2008 में भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बनकर इतिहास रचने वाले इस पूर्व निशानेबाज ने कहा कि इसके कार्यान्वयन से भारतीय प्रशासनिक मानक अगले स्तर पर पहुंच जाएंगे.

बिंद्रा ने कहा, ”यह अधिनियम खिलाड़ी केंद्रित भी है. यह प्रशासन में खिलाड़ियों के प्रवेश को बढ़ावा देता है और मुझे लगता है कि यह बहुत सकारात्मक है.” उन्होंने कहा, ”मैं इस अधिनियम के व्यापक रूप से सकारात्मक कार्यान्वयन की आशा करता हूं जो भारतीय प्रशासनिक मानकों को अगले स्तर पर ले जाएगा.” बिंद्रा ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह अधिनियम किसी भी तरह से ओलंपिक स्वायत्तता नियमों का उल्लंघन करता है.

उन्होंने कहा, ”मेरा मानना है कि यह अधिनियम यह स्पष्ट करता है कि अंतत? ओलंपिक चार्टर ही सर्वोच्च है.” अधिनियम में प्रावधान है कि प्रत्येक राष्ट्रीय खेल संघ की एक आम सभा होगी जिसमें प्रत्येक संबद्ध सदस्य के समान संख्या में प्रतिनिधि और कुछ पदेन सदस्य शामिल होंगे.

इसमें अधिकतम 15 सदस्यों वाली एक कार्यकारी समिति होगी जिसमें कम से कम दो उत्कृष्ट खिलाड़ी और चार महिलाएं होंगी.
बिंद्रा ने कहा, ”हम लैंगिक समानता के युग में जी रहे हैं और प्रशासन में महिलाओं का समावेश बहुत ही सकारात्मक है. मुझे लगता है कि वैश्विक खेल उस दिशा में सकारात्मक रूप से आगे बढ़े हैं और यह देखकर अच्छा लगता है कि इसका प्रभाव भारत में भी हो रहा है और यह अधिनियम उस पहलू को भी शामिल करता है.”

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