राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, भिलाई। नगर निगम भिलाई की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण साकेत नगर सड़क क्रमांक-2 में देखने को मिल रहा है। यहां के रहवासी पिछले करीब 12 वर्षों से करीब 250 मीटर सड़क के निर्माण का इंतजार कर रहे हैं। सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि बारिश के दिनों में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है, जबकि दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। बार-बार शिकायतों और गुहार के बावजूद नगर निगम ने इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया है। लोगों का कहना है कि नगर निगम ने लाखों रुपये खर्च कर सड़क के दोनों ओर सीमेंट कंक्रीट सड़क का निर्माण कराया, लेकिन बीच का लगभग 250 मीटर हिस्सा अधूरा छोड़ दिया गया। इसी अधूरे हिस्से के कारण पूरी सड़क की उपयोगिता खत्म हो गई है। बरसात के समय यही हिस्सा कीचड़ और पानी से भर जाता है, जिससे लोगों का घरों से निकलना तक दूभर हो जाता है। रहवासियों के अनुसार समस्या केवल सड़क तक सीमित नहीं है। क्षेत्र में नाली निर्माण का कार्य भी अधूरा छोड़ दिया गया है। कई स्थानों पर नाली का निर्माण नहीं होने और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी सीधे लोगों के घरों में घुसने लगा है। हालात तब और गंभीर हो गए जब किसी व्यक्ति ने नाली के एक हिस्से को बंद कर दिया। इसके बाद थोड़ा-सा पानी गिरते ही गंदा पानी सड़क पर भरने लगता है और धीरे-धीरे लोगों के घरों तक पहुंच जाता है। गंदे पानी के लंबे समय तक जमा रहने से पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है। रहवासियों का कहना है कि बदबू के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है। मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिक एमवी राव बताते हैं कि पूर्व आयुक्त राजीव कुमार पांडे ने क्षेत्र की समस्या को गंभीरता से लेते हुए सीमेंट सड़क निर्माण की स्वीकृति दी थी। उस समय जोन आयुक्त दिनेश कोसरिया ने भी मौके का निरीक्षण किया था और लोगों को भरोसा दिलाया था कि जल्द ही अधूरा हिस्सा बनाकर सड़क पूरी कर दी जाएगी। लेकिन आयुक्त के तबादले के बाद यह मामला फाइलों में दबकर रह गया। इसके बाद न तो अधूरी सड़क बनी और न ही नाली निर्माण पूरा किया गया। लोगों का आरोप है कि जोन स्तर के अधिकारियों ने भी दोबारा क्षेत्र का निरीक्षण करना जरूरी नहीं समझा। रहवासियों श्याम कुमार, संतराम, संतोष कुमार का कहना है कि उन्होंने कई बार निगम अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्या रखी, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। वर्षों बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है, जब गड्ढों में भरे पानी के कारण यह पता ही नहीं चलता कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। साकेत नगर के रहवासी अब नगर निगम की नवपदस्थ आयुक्त सुरुचि सिंह से उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि नई आयुक्त शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से निरीक्षण कर रही हैं, इसलिए वे साकेत नगर सड़क क्रमांक-2 का भी मौके पर निरीक्षण करें। लोगों का मानना है कि यदि आयुक्त स्वयं क्षेत्र की स्थिति देखेंगी तो अधूरी सड़क, जाम नाली और जलभराव की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि वर्षों से लंबित इस काम में किस स्तर पर लापरवाही हुई और जोन कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों ने आखिर क्यों लोगों की लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं कराया।

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