राष्ट्रवाणी: राज्य ब्यूरो,,रायपुर। अंतर्राज्यीय ग्रिड ब्लैकआउट जैसी आपात स्थिति में बिजली आपूर्ति को तेजी से बहाल करने की तैयारियों का परीक्षण करते हुए बिजली कंपनी ने सफल ब्लैक स्टार्ट माक ड्रिल किया। अभ्यास के दौरान बांगो जल विद्युत गृह से बिजली उत्पादन शुरू कर मात्र 32 मिनट में कोरबा स्थित ताप विद्युत संयंत्र तक स्टार्ट-अप पावर पहुंचा दी गई, जबकि पूरी ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन प्रक्रिया 41 मिनट में सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई। अधिकारियों के अनुसार यह सफल अभ्यास भविष्य में किसी भी बड़े विद्युत संकट की स्थिति में प्रदेश की बिजली व्यवस्था को शीघ्र सामान्य करने में महत्वपूर्ण साबित होगा। माक ड्रिल के तहत हसदेव, हसदेव-बांगो, जमनीपाली और कोरबा पूर्व के विद्युत तंत्र को अलग कर एक आइलैंडेड सब-सिस्टम तैयार किया गया। इसके बाद नियंत्रित तरीके से इसे पूर्ण ब्लैकआउट की स्थिति में लाया गया। बांगो जल विद्युत गृह के डीजल जनरेटर की मदद से इकाई क्रमांक एक को शुरू कर चरणबद्ध ढंग से हसदेव, जमनीपाली, कोरबा पूर्व और बाद में कोरबा पश्चिम तक स्टार्ट-अप बिजली पहुंचाई गई। बांगो जल विद्युत संयंत्र प्रदेश का एकमात्र ब्लैक स्टार्ट सक्षम जल विद्युत संयंत्र है, जिसकी स्थापित क्षमता 3×40 मेगावाट है। बड़े ग्रिड व्यवधान या पूर्ण ब्लैकआउट की स्थिति में यही संयंत्र अन्य बिजलीघरों को दोबारा शुरू करने के लिए आवश्यक स्टार्ट-अप पावर उपलब्ध कराता है। माक ड्रिल के दौरान ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला ने डंगनिया स्थित स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर से पूरी प्रक्रिया की निगरानी की। ट्रांसमिशन, जनरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के अभियंताओं ने समन्वित रूप से अभ्यास में हिस्सा लिया। 2 जनवरी 2001: इस दिन उत्तरी ग्रिड फेल होने से पूरे उत्तर भारत में बड़ा बिजली संकट पैदा हुआ था। 30-31 जुलाई 2012: इससे उत्तरी, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के 21 से अधिक राज्य प्रभावित हुए और 60 करोड़ से ज्यादा लोग अंधेरे में आ गए थे। राज्यों द्वारा निर्धारित कोटे से अधिक बिजली खींचना (ओवरड्रॉल), कमजोर ट्रांसमिशन नेटवर्क और लोड-सप्लाई में भारी असंतुलन के कारण सामने आए थे। अधिकांश क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल होने में 8 से 20 घंटे तक का समय लगा था, जिससे ट्रेनें और आवश्यक सेवाएं ठप हो गई थीं।
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