राष्ट्रवाणी: रवि भूतड़ा, न्यूज, बालोद। जिले के गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम चंदनबिरही का एक युवा इन दिनों देश की राजधानी दिल्ली में चल रहे शिक्षा व्यवस्था और छात्रहित से जुड़े आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका के कारण चर्चा में है। 26 वर्षीय इनेश साहू पिछले सात माह से दिल्ली में रहकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्र हितों की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। से फोन पर हुई बातचीत में इनेश ने अपने संघर्ष, भूख हड़ताल, संसद मार्च और आंदोलन के दौरान सामने आई परिस्थितियों की जानकारी साझा की। इनेश साहू पिता ओमप्रकाश साहू ने बताया कि वे बीएससी मैथमेटिक्स के छात्र हैं। उनके पिता ओमप्रकाश साहू किसान हैं। रोजगार की तलाश में वे करीब सात माह पहले दिल्ली पहुंचे थे, जहां उन्होंने चार अलग-अलग होटल और रेस्टोरेंट में काम किया। उन्हें प्रतिदिन 400 से 500 रुपये तक मजदूरी मिलती थी। इसी दौरान उन्होंने समाचार पत्रों में पढ़ा कि बेरोजगार युवाओं को “कॉकरोच” कहे जाने को लेकर देशभर में आक्रोश है और 6 जून को सीजेपी द्वारा जंतर-मंतर में बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था और बेरोजगारी को लेकर पहले से ही नाराज इनेश ने नौकरी छोड़ दी और आंदोलन में शामिल होने का फैसला कर लिया। उन्होंने कहा कि उनकी नाराजगी केवल दो-चार महीने की नहीं, बल्कि वर्ष 2020 से लगातार बनी हुई है। उनका मानना है कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है और इसी उद्देश्य से वे आंदोलन का हिस्सा बने हैं। इनेश ने बताया कि वे 6 जून को आयोजित पहले प्रदर्शन में भी शामिल रहे और 20 जून से जंतर-मंतर पर चल रहे धरना-प्रदर्शन में लगातार डटे हुए हैं। उन्होंने 24 जून से 30 जून तक लगातार सात दिन भूख हड़ताल की। उनका कहना है कि प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन शुरू करने से पांच दिन पहले ही उन्होंने अपना अनशन शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि अनशन के सातवें दिन उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में प्राथमिक उपचार मिलने के बाद उनका अनशन समाप्त हुआ। इस घटना की जानकारी मिलने पर उनकी मां मानबाई साहू की तबीयत भी खराब हो गई। मां को देखने के लिए वे 2 जुलाई को अपने गांव चंदनबिरही आए और 5 जुलाई को फिर दिल्ली लौटकर आंदोलन में शामिल हो गए। इनेश ने बताया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक निकाले गए मार्च में भी वे सबसे आगे शामिल थे। उनका आरोप है कि मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें पुलिस की लाठी से उनके हाथ और पैर में चोटें आईं। उन्हें एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार और पट्टी के बाद वे फिर आंदोलन स्थल की ओर निकल पड़े। उन्होंने बताया कि जब तक वे वापस पहुंचे, तब तक प्रदर्शन संसद भवन की ओर बढ़ चुका था। उन्होंने कहा कि उस दिन प्रदर्शनकारियों को पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं हो पाया। उनका आरोप है कि प्रशासन पानी की बोतलें भी अंदर नहीं ले जाने दे रहा था। इनेश ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान प्रशासन द्वारा जंतर-मंतर क्षेत्र में जैमर लगाए जाते हैं, जिससे मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवा पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। उनका दावा है कि लगभग चार किलोमीटर तक इंटरनेट काम नहीं करता और केवल रात दो से चार बजे के बीच कुछ समय के लिए नेटवर्क बहाल किया जाता है। इनेश ने कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि संसद तक शांतिपूर्ण मार्च में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न किया गया तो वे अपने जीवन तक की परवाह नहीं करेंगे। उनका कहना है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते। वे वर्तमान में प्रधानमंत्री कार्यालय के नाम हस्ताक्षर अभियान भी चला रहे हैं। आंदोलन स्थल पर आने वाले लोगों से वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर हस्ताक्षर करा रहे हैं। उनका दावा है कि अब तक 1,500 से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ चुके हैं और संख्या लगातार बढ़ रही है। इनेश ने बताया कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं को देशभर से लोगों का सहयोग मिल रहा है। कई सामाजिक संगठन, होटल संचालक और आम नागरिक भोजन के पैकेट, पानी और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन स्थल पर भोजन और पानी की सामान्यतः कोई कमी नहीं है। इनेश साहू ने बताया कि वे महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानते हैं और अहिंसक तरीके से अपनी बात रखने में विश्वास करते हैं। उनके परिवार में दो बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है और वे परिवार में मंझले हैं। उन्होंने बताया कि भूख हड़ताल के दूसरे दिन सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को उनके अनशन की जानकारी मिली। उन्होंने स्वयं आकर स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उनका अनशन तुड़वाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने अपना संकल्प नहीं छोड़ा और निर्धारित अवधि तक भूख हड़ताल जारी रखी।

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